सदर तहसील के गांव बरमतपुर में दलित परिवार के घर बुलडोजर चलाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में एसडीएम अर्चना अग्निहोत्री को काम के प्रति शिथिलता बरतने और स्थलीय निरीक्षण न करने पर निलंबित किया गया है। इसके साथ तत्कालीन लेखपाल व कानूनगो को भी निलंबित करने का आदेश हुआ है। इससे पहले ही कानूनगो, लेखपाल को बेदखली को निलंबित किया जा चुका है। नायब तहसीलदार को पद से हटाकर भूलेख कार्यालय से अटैच किया गया है। राजनेता अभी भी लखनऊ में पड़े हैं और कई अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई होने की आशंका जताई जा रही है।
दिव्यांग दंपती अनिल कुमार, पत्नी महारजिया और परिवार बरमतपुर में रहते हैं। उनके घर के बेजा कब्जे के हिस्से को राजस्व टीम ने 16 जुलाई को बुलडोजर से गिरा दिया था। 17 जुलाई को पूरा घर ढह गया था। ये घर भूमिधरी पर था। डीएम के निर्देश पर जांच शुरू हुई। जांच में सामने आया कि गाटा संख्या 36 पर तहसील न्यायालय से बेजाकब्जा हटाने का आदेश जारी हुआ था। उसी का पालन करना था, लेकिन राजस्व टीम ने गाटा संख्या 52 पर कार्रवाई कर दी, जो चक मार्ग है। ये राजस्व विभाग की मनमानी अधिकारियों पर भारी पड़ गई। इस मामले को लेकर राजनेताओं ने नाराजगी जताई। विधायक समेत कई नेता मौके पर पहुंचे।
मुख्य सचिव ने अपने स्तर पर अधिकारी भेजकर जांच कराई। इसके बाद एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत ने 22 जुलाई को गांव में पीड़ित परिवार से मुलाकात करके पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने नाराजगी जताते हुए दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही। वहीं विधायक जय कुमार सिंह जैकी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इसके बाद एसडीएम अर्चना अग्निहोत्री पर निलंबन की गाज गिरी है। उन पर नियम विरुद्ध व त्रुटिपूर्ण बेदखली कार्रवाई का स्थलीय निरीक्षण न किए जाने, अपने पद का दायित्वों एवं कर्तव्यों का शिथिलता पूर्वक निर्वहन किए जाने, गैर जिम्मेदाराना एवं उदासीन पर्यवेक्षण के लिए प्रथम दृष्टया उत्तरदायी मानते हुए कार्रवाई की गई। उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जांच के लिए लखनऊ मंडल के पदेन आयुक्त को जांच अधिकारी नामित किया गया है। इसके साथ ही तत्कालीन कानूनगो और लेखपाल को भी तत्काल निलंबित कर दिया गया है।
ये है पूरा मामला
जांच में सामने आया कि गाटा संख्या 36 मुख्य मार्ग और 52 रास्ता नाम से दर्ज है। गाटा संख्या 36 को गिराने का आदेश तहसीलदार न्यायालय से 2023 में हुआ था। राजस्व टीम ने गाटा संख्या 52 के मुख्य मार्ग के निर्मित हिस्से को गिराया। इसमें पीड़ित परिवार की भूमिधरी पर बना मकान भी चपेट में आ गया। इस मामले पहले ही कानूनगो जितेंद्र सिंह और लेखपाल अराधना देवी को निलंबित किया जा चुका है। इसके साथ ही नायब तहसीलदार जीएल राठौर को कार्रवाई में सजगता नहीं बरतने पर पद से हटाकर भूलेख कार्यालय में अटैच किया गया है।
2021 में लेखपाल ने दर्ज कराया था मुकदमा
साल 2021 में गांव के लेखपाल अनूप सिंह थे। उन्होंने ही सदर तहसीलदार की कोर्ट में बेदखली का मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दुखिया देवी व उनके चार पुत्रों ने आम रास्ते की भूमि पर मकान बना लिया है। इस रिपोर्ट को तत्कालीन कांधी कानूनगो आशीष पटेल ने आगे बढ़ाया था। ये मामला तहसीलदार कोर्ट में चला। उस दौरान तहसीलदार रहे इवेंद्र कुमार की कोर्ट के सामने पीड़ितों ने अपने बयान दर्ज कराए। दो साल सुनवाई के बाद तत्कालीन तहसीलदार इवेंद्र कुमार ने 2023 में बेदखली का फैसला सुनाया। उसके बाद मामला लंबित रहा। बरमतपुर गांव के एक ग्रामीण ने कोर्ट के आदेश का हवाला देकर लगातार शिकायत की। इस पर 2025 में कार्रवाई कर दी गई।
शासन की ओर से सदर एसडीएम को निलंबित किया गया है। वहीं तत्कालीन कानूनगो और लेखपाल को भी निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है। - रविंद्र सिंह, डीएम, फतेहपुर