आपको बता दें कि ये समस्या सिर्फ आयशा बेगम की ही नहीं इस तरह से करीब 200 वृद्ध हैं जो परेशान होकर समाजकल्याण विभाग के चक्कर काट रहे हैं। एसडीएम की लापरवाही के कारण वृद्धों के आवेदन 6 साल से लंबित पड़े हैं। सबसे ज्यादा लापरवाही बिल्हौर तहसील एसडीएम द्वारा बरती जा रही है। करीब 150 से अधिक आवेदन पत्र एसडीएम की लॉगिन पर लंबित पड़े हैं। वहीं एसडीएम सदर स्तर पर भी कई आवेदन लंबित हैं।
जिलाधिकारी से लेकर सीडीओ ने लंबित आवेदन पत्र निस्तारित के लिए कई बार पत्र भी लिखे लेकिन एसडीएम ने आवेदन पत्रों की स्वीकृत तक नहीं दी। वहीं वर्ष 2017 से 2024 तक करीब चार समाजकल्याण अधिकारी बदल गए लेकिन इन वृद्धों के पेंशन के आवेदन पत्र स्वीकृत कराने के लिए कोई अपने स्तर से प्रयास नहीं किया। जब कि समाजकल्याण अधिकारी की लॉगिन पर छ वर्ष पुराने लंबित आवेदन पत्रों की सूची भी दिखती है। विभाग के अफसर भी इन वृद्धों की सूची लेकर बैठे हैं। अपने स्तर से सत्यापन करने की जहमत तक नहीं उठायी।
30 दिन में लंबित आवेदन निस्तारित करने का नियम शासनादेश के मुताबिक अधिकारियों को 30 दिन के भीतर लॉग-इन पर आए आवेदन का निस्तारण करना होता है लेकिन एसडीएम की आईडी पर ताे पांच से छ साल पुराने आवेदन पत्र लंबित पड़े हैं। वहीं इस वित्तीयवर्ष में अब तक एक हजार से ज्यादा बुजुर्गों ने आवेदन किया है। इनके आवेदन पत्र ब्लाक और तहसील से फॉरवर्ड होकर विभाग नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में नए आवेदकों को भी पेंशन के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
सात वर्ष पुराने आवेदन पत्रों को लेकर एसडीएम और बीडीओ के साथ बैठक कर निर्देश दिए गए हैं। इसके आलावा जो भी आवेदन पत्र लंबित पड़े हैं उनको निस्तारित कराया जाएगा। सभी एसडीएम को पत्र लिखे गए हैं। - दीक्षा जैन, सीडीओ