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Kanpur News: यात्रियों को बीमार कर देगा बिना रैपर के डिब्बे का खाना

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कानपुर। सेंट्रल स्टेशन पर यात्रियों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। अधिकारियों की अनदेखी और संरक्षण में कैटर्स माफियाओं ने जाल फैला रखा है। माफिया नियमों को ताक पर रखकर यात्रियों को खराब व मानकविहीन भोजन बेच रहे हैं। भोजन के डिब्बों पर फर्म का रैपर नहीं लगा होता जिससे उसे बनाने वाले और ताजा होने की जानकारी नहीं मिल पाती। अधिकतर यात्री जल्दी में होते हैं इसलिए डिब्बा लेकर चले जाते हैं।
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रेलवे के नियमों के मुताबिक, सेंटर स्टेशन पर बेचे जाने वाले भोजन के हर पैकेट पर कैटर्स का नाम, मोबाइल नंबर, पैकिंग की तिथि और समय अंकित होना चाहिए। यह सब इसलिए किया जाता है ताकि भोजन खराब मिलने की स्थिति में यात्री शिकायत दर्ज करा सकें और संबंधित पर कार्रवाई हो सके, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। सेंट्रल स्टेशन पर 10 पंजीकृत स्टॉल हैं। यहां बिकने वाले भोजन पर यह रैपर लगा होना अनिवार्य है। प्लास्टिक की कैरेट में भोजन के सीलबंद डिब्बे रखकर बेचे जाते है। कैरेट में ऊपर तो रैपर लगे भोजन के डिब्बे होते हैं लेकिन उनके नीचे बिना रैपर के डिब्बे होते हैं। कभी कोई जांच होती है तो ऊपर लेबल लगे डिब्बे देखे जाते हैं। नीचे रखे डिब्बों के भोजन के पकने का समय व गुणवत्ता की गारंटी नहीं होती है।


जब कोई यात्री खराब भोजन या नियम उल्लंघन की शिकायत स्टॉल संचालकों से करता है तो बदसलूकी की जाती है। स्टॉल संचालकों और उनके गुर्गों के पक्ष में समझौता कराने का दबाव बनाया जाता है। तीन दिन पहले भी प्लेटफॉर्म नंबर 4/5 पर इसी तरह के एक मामले में यात्री से मारपीट की गई थी।
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दाल, रोटी और अचार के भोजन का डिब्बा 50 रुपये, चावल-छोले का 50 रुपये और अंडा करी-चावल का डिब्बा 60 रुपये का है। दो से नौ नंबर प्लेटफॉर्म तक इस तरह से भोजन के डिब्बे बिकते देखे जा सकते हैं। ये भोजन कैटर्स या स्टॉल लेने वाली फर्म के जरिए ही बेचे जाते हैं इसलिए उन पर रैपर लगना जरूरी होता है।



चौरीचौरा से बनारस जाना था, ट्रेन के एस-5 कोच में सीट है। सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन रुकी तो जल्दी में 50 रुपये का भोजन का डिब्बा ले लिया। थोड़ी देर बाद खोलकर खाया तो सब्जी खराब लगी लेकिन तब तक वेंडर भी जा चुका था। -श्याम सिंह

प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर खाने का डिब्बा लिया। इसके बाद वहीं लगे नल से हाथ-मुंह धोकर खाने लगे तो देखा कि डिब्बे पर फर्म का रैपर नहीं लगा था। वेंडर से पूछा तो बोला कि इससे क्या लेना-देना, खाना शुद्ध और ताजा है। -महेश
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वर्जन
समय-समय पर खानपान विभाग के अधिकारी स्टेशन परिसर पर बिकने वाले भोजन की जांच करते हैं। अगर शिकायत आती तो स्टॉल संचालक पर कार्रवाई भी की जाती है।
-आशुतोष सिंह, डिप्टी सीटीएम, कानपुर सेंट्रल स्टेशन
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