औरास सीएचसी का सीआरएस पोर्टल हैक कर जालसाज ने उसकी आईडी और पासवर्ड निकाल लिया और जन्म प्रमाणपत्र बनाने लगा। पोर्टल हैक होने की जानकारी पर सीएचसी प्रभारी ने पुलिस को शिकायत की। साइबर सेल ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। उसके पास से जन्म प्रमाणपत्र की 55 फोटो कॉपी, पोर्टल की यूजर आईडी, पासवर्ड, दो लैपटाप, प्रिंटर और चार स्मार्ट फोन बरामद किए हैं।
पुलिस लाइन में एसपी दीपक भूकर ने बताया कि 18 जनवरी को औरास सीएचसी प्रभारी डॉ. अनूप सिंह ने तहरीर दी थी कि सीएचसी के सीआरएस पोर्टल को हैक कर ईमेलआईडी और पासवर्ड तैयार कर फर्जी तरीके से जन्म-प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं। जारी प्रमाणपत्रों का अभिलेख भी अस्पताल में नहीं है। आईटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कर साइबर सेल ने जांच शुरू की तो हैक करने वाला आरोपी अभिषेक गुप्ता निवासी लखनऊ के नौबस्ता सआदतगंज के मकान नंबर 342/125 का रहने वाला है। उसने अपना कार्यालय तालकटोरा थाने के एसबी प्रेमा बिहार काॅलोनी में बनाया था।
साइबर सेल प्रभारी ज्ञानप्रकाश तिवारी ने आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने बताया कि वह 150 से अधिक लोगों जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए हैं। इनमें 23 उन्नाव के भी हैं। उसका साथी विजय, शहारनपुर का रहने वाला बताया जा रहा है। एसपी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी अभिषेक ने बहराइच सहित कई जिलों में यूजर आईडी और पासवर्ड बेचने की बात बताई है। गिरोह में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा रहा है।
जुगाड़ नाम का बनाया था व्हाट्सएप ग्रुप
एसपी ने बताया कि हैकर ने सरकारी पोर्टल हैक जुगाड़ के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। पुलिस के मुताबिक ग्रुप में कई जिलों के पांच सौ लोग जुड़े हैं। इसकी भी जांच कराई जा रही है। हैकर यूजर आईडी को तीन से चार हजार रुपये में और जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र को चार से पांच हजार रुपये में बनाकर देता था।
अक्तूबर महीने हुई थी पोर्टल हैक होने की जानकारी
औरास सीएचसी प्रभारी डॉ. अनूप सिंह ने बताया कि सीआरएस पोर्टल एमसीटीएस ऑपरेटर शिशिर विश्वास चलाते हैं। अक्तूबर महीने के पहले सप्ताह में दो से तीन लोग आए और बताया कि अभी उनका जन्म प्रमाणपत्र नहीं मिला है। इस पर ऑपरेटर से बात की तो उसने बताया कि पोर्टल में कोई दिक्कत आ रही है। बाद में आईडी में पड़े मेरे एक नंबर पर अननोन नंबरों से पासवर्ड आने लगे। यह ऑपरेटर को बताया कि उसने पोर्टल हैक होने की बात बताई। इसकी शिकायत डीएम कार्यालय में बने ई-डिस्टि्रक कार्यालय में की। वहां से जांच हुई तो पता चला कि 23 जन्म प्रमाणपत्र फर्जी बना दिए गए। इस पर नया आईडी, पासवर्ड जारी किया गया। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पुलिस से शिकायत की, तब जांच शुरू हुई।