परिजनों ने सात जुलाई को गुमशुदगी दर्ज कराई थी
तीनों को 16 जुलाई को लखनऊ के आलमबाग से गिरफ्तार किया गया। मृतका का शव छह जुलाई को दोपहर करीब ढाई बजे बिहार-मौरावां मार्ग पर केदार खेड़ा नहर पुलिया के पास मिला था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण सिर में गंभीर चोट होना सामने आया था। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। उधर मृतका के लापता होने पर उसके परिजनों ने सात जुलाई को लखनऊ के कृष्णा नगर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
अपने घर में रहने का दबाव बना रही थी मृतका
पुलिस ने स्वाट और सर्विलांस टीम की मदद से इस हत्याकांड का खुलासा किया। एसपी के अनुसार मुख्य अभियुक्त राधाकांत दूबे उर्फ कक्कू ने पूछताछ में बताया कि उसका मृतका से संबंध था। मृतका उस पर अपने घर में रहने का दबाव बना रही थी। इसी कारण उसने हत्या की योजना बनाई। पांच जुलाई को दोपहर करीब ढाई बजे उसने मृतका को अपने एक दोस्त के खाली मकान में बुलाया। वहां उसने कोल्ड ड्रिंक में नींद की दवा मिलाकर उसे पिला दी। अचेत होने के बाद राधाकांत ने ईंट से मारकर उसकी हत्या कर दी।
शव ठिकाने लगाने के लिए तैयार किया
हत्या के बाद राधाकांत ने रात में अपने मित्र उमेश चंद्र यादव को बुलाया। उमेश चंद्र यादव कार का मालिक है। राधाकांत ने उसे शव ठिकाने लगाने के लिए तैयार किया। उसने अपनी परिचित महिला सुमन वर्मा को भी बुलाया। सुमन वर्मा को इसलिए बुलाया गया ताकि रास्ते में पुलिस जांच के दौरान यह बताया जा सके कि वे परिवार के साथ महिला का उपचार कराने जा रहे हैं। तीनों ने मिलकर शव को उन्नाव के बिहार मौरावां मार्ग पर फेंक दिया था।
आरोपियों का लंबा आपराधिक इतिहास
गिरफ्तार अभियुक्तों में राधाकांत दूबे उर्फ कक्कू का लंबा आपराधिक इतिहास है। उसके खिलाफ कृष्णानगर थाने में हत्या, लूट, आर्म्स एक्ट और गुंडा एक्ट सहित 18 मुकदमे दर्ज हैं। उमेश चंद्र यादव के खिलाफ भी लखनऊ और उन्नाव के विभिन्न थानों में हत्या, लूट और आर्म्स एक्ट सहित सात मुकदमे दर्ज हैं। सुमन वर्मा के आपराधिक इतिहास का उल्लेख विज्ञप्ति में नहीं है। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त सेलेरियो कार भी बरामद की है। बीघापुर सीओ मधुपनाथ मिश्रा ने बताया कि उमेशचंद्र पर कृष्णानगर थाना क्षेत्र में 2009 हत्या के मुकदमे में सजायाफ्ता है और इस समय जमानत पर है। जबकि राधाकांत पर मलिहाबाद थाना क्षेत्र में हुई हत्या के मुकदमे में नामजद है।