उन्नाव में पीड़िता से दुष्कर्म और उसके पिता की मौत के बाद सुर्खियों में आए विधायक प्रकरण में 20 महीनों में कई ऐसे मोड़ आए जब मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा। बीते साल 4 अप्रैल 2018 को दुष्कर्म पीड़िता के पिता की पिटाई और मौत होने के बाद विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज हुई।
वहीं विधायक के भाई अतुल सेंगर के खिलाफ पीड़िता के पिता की हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई। पीड़िता के पिता पर आर्म्स एक्ट की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले व्यक्ति के 28 अप्रैल 2017 को अचानक लापता होने से मामले ने तूल पकड़ा।
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उन्नाव विधायक सेंगर प्रकरण
- फोटो : अमर उजाला
पीड़िता के चाचा ने विधायक पर उसके परिवार के सदस्य से जबरन रिपोर्ट दर्ज कराने और फिर उसे गायब करने का आरोप लगाया तो सनसनी फैल गई। पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की। सात दिन बाद वह वापस लौटा तो मामला ठंडा हुआ।
इसके बाद दुष्कर्म पीड़िता के पिता से मारपीट की घटना में सीबीआई के गवाहों में शामिल यूनुस की 23 अगस्त 2018 को मौत के बाद अचानक घटना में नया मोड़ आया। विधायक पक्ष पर गवाह को जहर देकर जान से मारने का शक जताया। इस पर शव को दफन करने के चौथे दिन कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया। बीमारी से मौत की पुष्टि के बाद मामला ठंडा पड़ा।
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20 नवंबर 2018 को पीड़िता के चाचा को पुलिस ने एक पुराने मुकदमे में जारी वारंट के आधार पर दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। उसकी गिरफ्तारी से मामला एक बार फिर सुर्खियों में रहा।
28 जुलाई 2019 रायबरेली जिले में हुए रहस्यमय हादसे और उसमें पीड़िता की चाची व मौसी की मौत के साथ पीड़िता व उसके वकील की हालत गंभीर होने की घटना से यह प्रकरण एकबार फिर राष्ट्रीय स्तर पर छा गया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया तो जांच में और तेजी आई।
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जेल जाने के 15 महीने बाद रद्द हुए शस्त्र लाइसेंस
विधायक कुलदीप सेंगर का रसूख उसके जेल जाने के बाद भी कायम रहा। इसी का नतीजा रहा कि जेल जाने के 15 महीने बाद उसके शस्त्र लाइसेंस तब रद्द हुए जब जुलाई 2019 मेें रायबरेली जिले में पीड़िता सड़क हादसे की शिकार हुई और मामला सुर्खियों में आया।
अप्रैल 2018 में विधायक कुलदीप सेंगर पर किशोरी से दुष्कर्म की शिकायत दर्ज हुई थी। सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने विधायक के शस्त्र लाइसेंस रद्द करने की मांग की थी। विधायक के पास उनके नाम से एक रायफल, एक रिवाल्वर और एक बंदूक (सिंगल बैरल) है।
रायबरेली में हुए रहस्यमय सड़क हादसे के बाद मामला फिर चर्चा में आया। इसके बाद जिला प्रशासन सवालों के घेरे में आया तो जिला मजिस्ट्रेट देवेंद्र कुमार पांडेय ने प्रकरण की सुनवाई कर विधायक के तीनों लाइसेंस रद्द कर दिए।