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मेहनत पर विश्वास से रिद्धिमा ने जीती हक की लड़ाई, बढ़े 9 अंक तो यूपी में मिला सातवां स्थान

Wed, 24 Jul 2019 10:06 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
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पिता आशीष शुक्ला, मां और भाई ऋषभ के साथ छात्रा रिद्धिमा - फोटो : अमर उजाला
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अपनी मेहनत पर जितना विश्वास उन्नाव की छात्रा रिद्धिमा को था। उससे कहीं ज्यादा परिवार को उसकी योग्यता पर। बेटी ने अपने हक की लड़ाई लड़ने की ठानी तो पिता सहित पूरा परिवार उसके साथ हो गया। अफसरों से शिकायतें कीं। सूचना के अधिकार का भी सहारा लिया लेकिन बात नहीं बनी।
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न्यायालय की शरण ली तो मेधावी रिद्धिमा को उसकी मेहनत का फल मिला। परीक्षाफल में 9 अंक जुड़ने से प्रदेश में संयुक्त रूप से सातवां स्थान हासिल हुआ। अब लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों को दंड भी मिला है। न्यायालय ने कॉपी जांचने वाले पांच शिक्षकों पर बीस-बीस हजार जुर्माना लगाते हुए रकम छात्रा को देने का आदेश दिया है। जीत पर छात्रा उसके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

त्रिवेणी काशी इंटर कॉलेज बिहार की छात्रा रिद्धिमा शुक्ला ने वर्ष 2018 की हाईस्कूल परीक्षा दी थी। मेहनत के अनुसार उसे विश्वास था कि उसका नाम प्रदेश की मेरिट में जरूर आएगा। रिजल्ट आया तो छात्रा को 554 अंक मिले। संस्कृत व सामाजिक विषय में अंक कम मिले थे। रिजल्ट आने के बाद रिद्धिमा का विश्वास तो डगमगाया लेकिन हार नहीं मानी।
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अधिकारियों से शिकायत की। पुनर्मूल्यांकन के लिए महीनों चक्कर लगाए लेकिन बात नहीं बनी। सूचना के अधिकार ने उसे अपनी उत्तर पुस्तिका देखने का मौका दिलाया। उत्तर पुस्तिका देख वह हैरान रह गई संस्कृत की कॉपी आधी ही जांची गई थी।

काफी इंतजार के बाद भी जब रिजल्ट में सुधार नहीं हुआ तो पिता आशीष कुमार ने हाईकोर्ट की शरण ली और उत्तर पुस्तिकाओं के दोबारा मूल्यांकन की मांग की। पुनर्मूल्यांकन में संस्कृत विषय में 7 और सामाजिक विषय में 2 अंक बढ़े। कुल 9 अंक बढ़ने से छात्रा का कुल प्राप्तांक 563 हो गया। वह संयुक्त रूप से प्रदेश में सातवें स्थान पर आ गई थी।

पिता आशीष कुमार ने बताया कि उन्हें यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव का एक पत्र मिला है। जिसमें उत्तर पुस्तिका जांचने में लापरवाही बरतने वाले पांच शिक्षकों में प्रत्येक से 20-20 हजार रुपये जुर्माना किया गया है। जुर्माने की यह रकम 23 जुलाई 2019 तक रिद्धिमा को देने के लिए कहा गया है। अब इंटर की पढ़ाई कर रही रिद्धिमा का कहना है उसे अपनी मेहनत पर विश्वास था तभी वह अपने हक की लड़ाई जीत पाई। उसके माता पिता भी बेटी की सफलता और न्यायालय के फैसले से खुश हैं। पिता आशीष कुमार और मां बिटन्नी देवी कहतीं है उन्हें अपनी बेटी पर नाज है।
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