फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Unnao case: पीड़िता से मिलने जा रहे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर को पुलिस ने रोका तो गंगा बैराज पर दिया धरना

Mon, 22 Feb 2021 06:46 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
समर्थकों के साथ धरने पर बैठे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

कानपुर के सर्वोदय नगर स्थित रीजेंसी अस्पताल में भर्ती उन्नाव कांड की पीड़िता से मिलने जा रहे भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण को पुलिस ने गंगा बैराज पर रोक लिया। इससे नाराज भीम आर्मी समर्थकों ने बैराज पर जमकर हंगामा किया और चंद्रशेखर के साथ धरने पर बैठ गए। देर रात मौके पर पहुंचे एसीएम पांच को ज्ञापन सौंप चंद्रशेखर ने धरना समाप्त किया।

विज्ञापन


चंद्रशेखर का सोमवार सुबह पीड़िता और उसके परिजनों से मिलने का कार्यक्रम था। इसके चलते अस्पताल के बाहर दो सीओ और तीन थानों की पुलिस लगा दी गई थी। एलआईयू को भी सतर्क किया गया था। दोपहर बाद पुलिस प्रशासन ने रणनीति बदलकर चंद्रशेखर को गंगा बैराज पर ही रोकने का निर्णय लिया। 

शाम करीब साढ़े चार बजे चंद्रशेखर गंगा बैराज पहुंचे। वहां पहले से मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट हिमांशु गुप्ता, एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुुमार, सीओ कर्नलगंज त्रिपुरारी पांडेय, सीओ नजीराबाद संतोष सिंह, सीओ स्वरूपनगर महेंद्र सिंह देव सहित 10 थानों की फोर्स ने उनके काफिले को रोक लिया। इससे नाराज भीम आर्मी के समर्थकों ने देर रात तक हंगामा किया और भीम आर्मी प्रमुख के साथ धरने पर बैठे रहे। चंद्रशेखर दिल्ली से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे थे और इसके बाद सड़क मार्ग से कानपुर आ रहे थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

गंगा बैराज पर तैनात पुलिस बल - फोटो : amar ujala
चंद्रशेखर ने कहा - उन्नाव कांड में जो तीसरी किशोरी 17 फरवरी की रात से मौत से जंग लड़ रही है, मैं उससे मिलने आया हूं। हम शुरुआत से ही मांग कर रहे हैं कि पीड़िता को एम्स भेज दिया जाए। यहां उसे प्राइवेट अस्पताल में रखा गया है, जबकि सरकार और पुलिस सरकारी अस्पताल का मेडिकल मानती है। इसलिए मैं इतने दिनों तक इंतजार करने के बाद आया कि अपनी बहन से मिल लूं और पीड़ित परिवार से मिलकर उनकी तकलीफें जान सकूं। मैंने यहां के डीएम से बात की तो उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार ने हमसे कहा ही नहीं कि एम्स भेज दो।
 
चंद्रशेखर ने कहा, मैं ये जानना चाहता हूं कि अगर बच्ची की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सक्रिय है तो क्या वह पीड़ित परिवार की रजामंदी का इंतजार करेगा? क्या पीड़ित परिवार की रजामंदी के बाद उसे निजी हॉस्पिटल लाया गया था। पुलिस के रोकने का विरोध करते हुए कहा, जितनी पुलिस मुझे रोकने के लिए लगा रखी है इतनी अगर अपराधियों को रोकने के लिए लगाई जाए तो शायद अपराध खत्म हो जाएं।
 
बता दें कि उन्नाव कांड में मौत से संघर्ष कर रही तीसरी किशोरी की हालत में डॉक्टरोें को सुधार दिखा है। रविवार को उसने खाना पीना भी शुरू कर दिया था। पुलिस को उम्मीद है कि सोमवार को किशोरी के मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज किए जा सकेंगे। किशोरी शहर के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती है। अब किशोरी का वेंटीलेटर सपोर्ट हटाया गया है। मजिस्ट्रेट के सामने किशोरी के बयान दर्ज किए जा सकते हैं, जिससे असोहा कांड के कई राज खुल सकेंगे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें