कानपुर में एक कोरोना मरीज को जब प्लाज्मा थेरेपी के लिए डोनर नहीं मिला तो उसने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग से संपर्क किया। विभाग की नोडल अधिकारी डॉ. लुबना खान ने उसे संपर्क में आए लोगों की जांच कराने की सलाह दी।
इसमें ऐसे लोग मिले जिनके खून में कोरोना की एंटीबॉडीज थीं। इन सभी को संक्रमण होकर ठीक भी हो गया था, लेकिन इन्हें भनक तक नहीं लगी। डॉ. खान ने बताया कि एंटीबॉडीज मिलने के बाद प्लाज्मा लेकर मरीज को चढ़ाया गया। थेरेपी के बाद वह ठीक हो गया।
इसी तरह पिछले सप्ताह रूसी वैक्सीन के ट्रायल के लिए मेडिसिन ओपीडी से रैंडम तौर पर चुने गए चार वॉलंटियर की जांच में भी कोरोना की एंटीबॉडीज मिली थीं। ये चारों भी संक्रमण होने पर अंजान रहे और कोरोना विजेता बन गए। शासन के सीरो सर्वे में ऐसे 21.22 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज मिली थीं।
इससे कोरोना के खिलाफ लोगों में हर्ड इम्युनिटी विकसित होने के संकेत मिल रहे हैं। इसे देखते हुए ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग ने हेल्थ केयर वर्करों के बीच भी सीरो सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी स्वस्थ हेल्थ वर्करों के सैंपल लिए जाएंगे।