किसान के बेटे ने गोवंश के प्रोत्साहन का संदेश देने के लिए अपनी शादी में दुल्हन की विदाई कार नहीं, बल्कि बैलगाड़ी से कराई। जिसकी लगाम दूल्हे ने थामी। ये नजारा हर कोई देखता रह गया।
पैलेस में धूमधाम से शादी होने के बाद दुल्हन लग्जरी कार नहीं फूलों से सजी बैलगाड़ी पर विदा हुई। दूल्हे ने खुद बैलों की लगाम थामी और अपनी जीवन साथी को घर ले गया। बैलगाड़ी पर विदाई देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। दूल्हे ने कहा कि गोवंश को प्रोत्साहन देने के लिए यह कदम उठाया है।
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नगर के चरखारी रोड निवासी राजीव द्विवेदी ने अपने बेटे विवेक का रिश्ता चरखारी के सूपा निवासी राकेश शुक्ला की बेटी रोहिणी से तय किया। रविवार रात चरखारी रोड के एक विवाह घर में दोनों की धूमधाम से शादी हुई। विदाई की रस्म के लिए भारतीय परिधान से सजे दूल्हा विवेक बैलगाड़ी लेकर अपनी दुल्हन को लेने पहुंच गए। उन्होंने कहा किसान के बेटे हैं और अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। कहा लक्जरी गाड़ियों में विदाई की संस्कृति उन्हें रास नहीं आई। इस लिए उन्होंने अपनी जीवन साथी को बुंदेलखंड की पारंपरिक बैल गाड़ी से विदा कराने की सोची। वहीं दुल्हन रोहिणी ने भी आगे बढ़कर अपने पति का साथ दिया। फूलों से सजी बैलगाड़ी पर बैठ कर अपनी ससुराल के लिए विदा हुईं।