न्यायमित्र ने आरोपियों की ओर से कोर्ट में की बहस
मुकदमे के दोनों आरोपी भारत के नहीं थे। हालांकि आरोपियों की जमानत अर्जी निजी वकील द्वारा दाखिल की गई थी लेकिन अर्जी खारिज होने के बाद कोई अधिवक्ता नहीं आया। इस पर अदालत ने आरोपियों की ओर से उनका पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता महेंद्र कुमार दुबे को न्याय मित्र के रूप में नियुक्त किया। महेंद्र ने ही सभी गवाहों से जिरह की और शुक्रवार को अदालत में आरोपियों में पक्ष में बहस की।
कानपुर के न्यायिक इतिहास में शायद शहर की किसी अदालत में पहली बार इस तरह के मुकदमे की सुनवाई हुई। मुकदमे में पीड़िता बांग्लादेश की है तो आरोपियों में से भी एक बांग्लादेशी और दूसरा शरणार्थी है। दोनों ही पक्षों का भारत से कोई लेनादेना नहीं लेकिन भारतीय सीमा के अंदर अपराध होने के कारण इस मामले में भारतीय कानून लागू हुआ। कानपुर सेंट्रल पर गिरफ्तारी के चलते कानपुर की अदालत में मुकदमे की सुनवाई की गई। - जितेंद्र कुमार पांडे, एडीजीसी
दूसरे देश की पीड़िता हमारे शहर के राजकीय बालिका गृह में पिछले डेढ़ साल से रह रही थी। मुकदमे के निस्तारण के साथ ही जल्द ही उसकी बांग्लादेश वापसी के रास्ते खुल सकेंगे। कानपुर की अदालत में चलने वाले अपनी तरह के इस पहले मुकदमे को विशेष मुकदमों की श्रेणी में रखा गया। अदालती आदेश पर पैरोकारों के विशेष प्रयास से गैर जिले के गवाहों को भी समय पर कोर्ट में हाजिर कर बयान दर्ज कराए गए हैं।- विवेक शुक्ला, एडीजीसी