यूनिसेफ ने बांदा जिले में बच्चों में बढ़ रहे इंफेक्शन (संक्रमण) पर चिंता जताते हुए इस पर रोक लगाने पर जोर दिया है। साथ ही बच्चों की सफाई और उनके जन्म का पंजीकरण किए जाने को कहा है।
शनिवार को लखनऊ में यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित सुपोषण कार्यशाला में तमाम विसंगतियों पर भी चर्चा हुई।
डीएम हीरालाल ने इसमें हिस्सा लिया और अपने संबोधन में उन्होंने कुपोषण को एक बड़ा मुद्दा बताया। कहा कि यूनीसेफ की टीम के साथ समन्वय स्थापित कर जिले में विभिन्न सेक्टरों स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, वास, चाइल्ड प्रोडक्शन, कम्यूनिकेशन फार डेवलपमेंट एवं समावेशी सामाजिक नीति पर कार्य कर बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाया जा सकता है।
पायलेट प्रोजेक्ट के तहत बांदा जिले में कुपोषण बच्चों की संख्या में कमी आई है। आयु के अनुसार बच्चे की लंबाई व वजन होना आवश्यक है, वरना शारीरिक रूप से कमजोर होता है। डीएम ने बताया कि कुपोषण के खिलाफ अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आशा, एएनएम आदि को लगाया गया है।
कार्यशाला में यूनिसेफ फील्ड आफिस (लखनऊ) चीफ सुश्री लियानो, पीएम अमित मेहरोत्रा, रिचा एस पांडेय, डा.प्रफुल, सत्यवीर सिंह आदि ने भी कार्यशाला को संबोधित करते हुए बांदा में कुपोषण मिटाने के लिए किए जा रहे कार्यों को सराहा।
लेकिन बच्चों में बढ़ रहे संक्रमण पर चिंता जताई। कार्यशाला में एडीएम (न्यायिक) संजय कुमार, सीएमओ डा. संतोष कुमार, डीएसटीओ संजीव बघेल, उप कृषि निदेशक एके सिंह, डीपीआरओ संजय यादव आदि मौजूद रहे।