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Kanpur News: पोर्टल पर नजर नहीं आ रहे वित्तविहीन कॉलेज, कैशलेस चिकित्सा का इंतजार बढ़ा

Sat, 26 Sep 2026 01:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। जिले के 243 वित्तविहीन कॉलेजों के करीब 1600 से अधिक शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा के लिए अभी इंतजार करना होगा। दरअसल विकसित किए गए पोर्टल पर अभी वित्तविहीन कॉलेजों का ब्योरा प्रदर्शित नहीं होने से यह स्थिति बनी है।
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शासन की ओर से वित्तविहीन माध्यमिक कॉलेजों के शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सेवा प्रदान करने की हरी झंडी दी है। शासनादेश जारी होने के बाद बीते 11 सितंबर को शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने डीआईओएस को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इधर विकसित किए गए पोर्टल पर वित्तविहीन माध्यमिक कॉलेज नजर नहीं आ रहे हैं। इसकी वजह से इन कॉलेजों में पढ़ा रहे करीब 1600 से अधिक शिक्षकों का कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए इंतजार बढ़ गया है। दरअसल पोर्टल पर पहले इन कॉलेजों के प्रधानाचार्यों की आईडी बनेगी। इसके बाद शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए आवेदन कर पाएंगे। प्रधानाचार्य की संस्तुति के बाद यह आवेदन अनुमोदन के लिए डीआईओएस के पोर्टल पर पहुंचेगा। उनका अनुमोदन मिलने पर शिक्षक पोर्टल से कैशलेस चिकित्सा सुविधा का कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे।
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बयान......
कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए विकसित पोर्टल पर वित्तविहीन माध्यमिक कॉलेज प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं। इसके लिए निदेशालय को पत्राचार किया गया है। जल्द ही पोर्टल पर वित्तविहीन माध्यमिक कॉलेज प्रदर्शित होने की उम्मीद है। - बृजभूषण चौधरी, डीआईओएस कानपुर देहात
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फोटो- 5 जनता इंटर कॉलेज बाढ़ापुर। आर्काइव
वित्तपोषित सात कॉलेजों की नहीं बन सकी आईडी
कानपुर देहात। जिले में 67 वित्तपोषित माध्यमिक कॉलेज हैं। कैशलेस चिकित्सा सुविधा के अंतर्गत अब तक 60 कॉलेजों की आईडी बनने के बाद करीब 570 शिक्षकों के आवेदनों का अनुमोदन हो गया है। इसमें से अधिकांश शिक्षकों ने कैशलेस चिकित्सा कार्ड भी डाउनलोड कर लिया है। जबकि खामियों की वजह से जनता इंटर कॉलेज बाढ़ापुर, श्रीदेवीसहाय इंटर कॉलेज डेरापुर, पटेल विद्यापीठ बरौर, श्रीगांधी गर्ल्स कॉलेज झींझक, लेफ्टिनेंट कर्नल शिवनाथ सिंह इंटर कॉलेज रंजीतपुर समेत सात कॉलेजों की आईडी नहीं बन सकी है। कुछ कॉलेजों के प्रधानाचार्य के मोबाइल नंबर में अंतर से दिक्कत है। तो कुछ कॉलेजों में अन्य सूचनाएं अद्यतन न होने से रुकावट है। डीआईओएस ने बताया कि खामियां दुरुस्त कराकर जल्द ही शेष वित्तपोषित कॉलेजों की आईडी बना ली जाएगी। (संवाद)
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