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Kanpur News: यू-डायस बना स्कूलों के गले की हड्डी

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कानपुर। यूनिफाइड डिस्टि्रक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यू-डायस) स्कूलों के गले की हड्डी बन चुका है। सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य किए गए यू-डायस के फार्म को भरने में परेशानी आ रही है। अभिभावक-बच्चे का डाटा मिस मैच होने, आधार कार्ड न होने, बर्थ सर्टिफिकेट न होने की समस्या के कारण स्कूल और अभिभावक दोनों ही परेशान हैं।
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शहर के 80 फीसदी स्कूलों में न तो कंप्यूटर है और न ही कंप्यूटर शिक्षक। स्कूलों को अपना यू-डायस का काम कैफे से कराना पड़ता है। इसके लिए विभाग की ओर से कोई बजट भी आवंटित नहीं होता है।
सभी परिषदीय-माध्यमिक स्कूलों के लिए यू-डायस अनिवार्य हो गया है। इसमें स्कूल को छात्रों, अभिभावकों, स्कूल के बारे में विस्तार से जानकारी देनी है। छात्रों का आधार, बर्थ सर्टिफिकेट, कक्षा संख्या, अंक, पिछली कक्षा का ब्योरा सहित कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है। इस सत्र से इसे अनिवार्य कर दिया है। इस आदेश के बाद से स्कूलों में उथलपुथल मची है। विशेषकर माध्यमिक और परिषदीय विद्यालय परेशान हैं। यहां पर निम्न आर्य वर्ग के छात्र पढ़ने आते हैं। ऐसे स्कूलों में न तो कंप्यूटर है और न ही इन छात्रों के पास सभी दस्तावेज हैं। किसी के पास दस्तावेज है तो उम्र और कक्षा में अंतर है। स्कूल संचालक कैफे जाकर जैसे तैसे फार्म भरवा रहे हैं लेकिन छात्रों और उनके अभिभावकों के डाटा में मिस मैच होने से काफी त्रुटि हो रही है। समस्याओं के समाधान के लिए स्कूल संचालकों को क्लस्टर संसाधन केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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कई स्कूल संचालकों का कहना है कि विभाग की ओर से यू-डायस फार्म भरने की ट्रेनिंग नहीं दी गई। इसी मांग को लेकर महारानी अहिल्याबाई होल्कर विद्यालय प्रबंध कल्याण समिति के जिलाध्यक्ष बृजेश सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपा है। उनका कहना है कि स्कूल संचालकों को यू-डायस कैसे भरा जाना, गड़बड़ी होने पर कौन सा फार्म भरना है इसकी जानकारी नहीं है। सब कुछ कैफे संचालकों पर निर्भर है। स्कूल संचालक प्रति छात्र 30-50 रुपये शुल्क लेते हैं, त्रुटि हो जाए तो इतने ही पैसे फिर देने पड़ते हैं। कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को 2500-3000 रुपये की चपत लग रही है। कहा कि कई छोटे स्कूलों में मजदूर के बच्चे पढ़ने आते हैं। इनके अभिभावक बर्थ सर्टिफिकेट कहां से दें।
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