कानपुर में गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन से गुरुवार को दो श्रमिक स्पेशल ट्रेनें बिहार के लिए रवाना हुईं। कानपुर में फंसे रहे, गैर प्रांतों से पैदल चले आ रहे और यहां काम करने वाले मजदूरों समेत कुल 2962 यात्रियों और प्रवासी श्रमिकों को लेकर ट्रेनें रवाना हुईं। दोनों ट्रेनें शुक्रवार को अपने गंतव्य पर पहुंची।
गुरुवार की शाम को पहली ट्रेन मधुबनी के लिए रवाना हुई जबकि दूसरी ट्रेन का शेड्यूल रात नौ बजे बिहार के कटिहार के लिए रवाना हुई थीं। इन ट्रेनों से मजदूरों को खाना-पानी देकर रवाना किया गया। स्टेशन में दाखिल होने से पहले सभी की थर्मल स्क्रीनिंग की गई।
पैदले चले आ रहे कई श्रमिकों को पुलिस ने रोककर अलग-अलग सेंटरों में क्वॉरंटीन कर दिया था। कई लोगों को आश्रय स्थलों में रुकवाया गया था। रोडवेज की बसों से इन्हें गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन लाया गया। गोविंदपुरी स्टेशन से मधुबनी तक का रेल किराया 435 रुपये तय था। यात्रियों को पास के तौर पर टिकट दिया गया लेकिन उनसे पैसा नहीं लिया गया।
सीतामढ़ी निवासी मंजू देवी ने बताया बेटे के हाथ में समस्या है। उसके इलाज को सीतामढ़ी से कानपुर आई थी। यहां गोविंद नगर में भाई काम करता है, उसके पास रुकी थी। कोरोना संक्रमण फैला तो बेटे का इलाज भी नहीं हुआ और घर पर पति की तबीयत भी खराब हो गई। अब वापस जा रही हूं।
गया की रहने वाली दीबा ने कहा शिवराजपुर में पति एक दूध की कंपनी में काम करते हैं। पति के साथ होली के बाद आई थी और इसके बाद महामारी फैल गई। अब काम भी नहीं चल रहा था। किसी तरह रुके थे, अब ट्रेन चली है तो वापस गांव जा रही हूं।
कटिहार निवासी मोहम्मद शहंशाह बोले जूही के मदरसा में पढ़ाई करता हूं। 16 मार्च को इम्तिहान हो चुका था। दस्तारबंदी का जलसा होना था, इसलिए रुका था लेकिन तब तक लॉकडाउन हो गया। अब बिहार के लिए ट्रेन चली तो अपने घर जा रहा हूं।
सहरसा के रहने वाले अरूण ने बताया कि हरियाणा के गुड़गांव में मार्बल की कंपनी में काम करता था। लॉकडाउन में फंसा रहा। हिम्मत टूट रही थी तो पैदल ही चल निकला। पैदल चलते-चलते राजनीति होने लगी तो चार दिन पहले कानपुर में रोककर एक सेंटर में रुकवाया। यहां खाना-पानी मिला और अब ट्रेन चल रही है तो घर जा रहा हूं।