आईपीएस, आईआरएस अफसर बनकर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा
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सीबीआई, पुलिस और राजस्व विभाग का फर्जी अधिकारी बनकर ठगी करने वाले गैंग के सरगना मनीष के झांसे में आकर इटावा जिले के कई अफसर महीनों से उसकी जी हुजूरी कर रहे थे। अफसर भी उसे असली अधिकारी समझ अपनी ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए उससे पैरवी करवा रहे थे।
रविवार को सरगना समेत पांचों जालसाजों को जेल भेजने के बाद हुई छानबीन में उनकी ठगी के कई और मामले सामने आए। सरगना मनीष ने अपने गांव क्षेत्र के लोगों को भी ठगी का शिकार बनाया है।
जसवंतनगर थाना में जगसौरा गांव की प्रधान रूबी मिश्रा के पति सतानंद मिश्रा ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि कुछ समय पहले गांव के ही मनीष कुमार पुत्र रामप्रकाश ने उनके घर आकर अपने को विजिलेंस अधिकारी बताया और कहा था कि वह राजेंद्र पुत्र रामनाथ के शिकायती पत्र की जांच करने आया है।
उनकी प्रधान पत्नी व उसे सरकारी रकम के गबन की बात करते हुए धमकाया था। उसने फर्जी आरोप लगाया था कि मजदूरों को भुगतान नहीं किया जा रहा। इसकी जांच करने आया है।
उनसे एक लाख रुपये मांगे थे। न देने पर मुकदमा कायम करने की धमकी दी थी, चूंकि न तो कोई गबन हुआ था और न ही इतने रुपये उनके पास थे, इसलिए उन्होंने रुपये नहीं दिए। तब उसने मुकदमे की धमकी दी थी। उसके बाद भी कई बार उसने फोन कर रुपये मांगे थे, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था। सतानंद की तहरीर पर जालसाज मनीष के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
सीबीआई अफसर बन पहुंचा था वसूली करने
सिविल लाइन थाने में भी कमला कालोनी के भूरे सिंह भदौरिया ने जालसाज मनीष के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। बताया कि उनके पास जालसाज हाल ही में 11 जून को सीबीआई अधिकारी बनकर पहुंचा था। उनका बेटा सर्वेश नोएडा में कंस्ट्रक्शन और प्रापर्टी का काम करता है।
मनीष ने कहा था कि बेटे ने एक प्लाट खरीद में फर्जी गवाही दी है, जिसकी जांच करने आया है। बेटे ने जालसाज से बात कर दिल्ली आने को कहा था, लेकिन गवाही जैसे मामलों में सीबीआई जांच की बात भूरे सिंह को खटक गई। उन्होंने थाना पुलिस को खबर कर दी। जिसके बाद जालसाज पुलिस की निगाह में चढ़ गया और फिर दबोचा गया।
कई बड़े नेताओं और अफसरों से था याराना
सूत्रों के मुताबिक, मनीष कई साल से प्रदेश के साथ जिले में भी जालसाजी कर रहा था। यहां के कई बड़े नेताओं और अफसरों से याराना था। अफसर और नेता उसे असली अधिकारी समझकर जी हुजूरी करते थे। कुछ अफसरों ने अपनी पोस्टिंग और तबादले को जुगाड़ लगाए थे।
सूत्रों का कहना है कि मनीष के शहर में आने पर अधिकारी उसके लिए होटल और गेस्ट हाउस में कमरे बुक करवाते थे। मनीष की गिरफ्तारी के बाद फंसने के डर से संपर्क वाले अफसर अब पैरवी में जुटे है। सिविल लाइन थाना प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र सिंह राठी ने बताया कि फिलहाल मनीष व उसके गैंग सदस्यों पर दो मामले दर्ज हुए हैं।
गैंग के पकड़े जाने के बाद और भी और मामले सामने आएंगे। पुलिस जांच कर रही है। कहा कि सरगना के पास जो दो शस्त्र लाइसेंस मिले हैं, उनके निरस्त्रीकरण की कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर होगी।