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Kanpur News: सूरज तिवारी की हत्या में प्रयोग एंबुलेंस सहित दो हत्यारोपी गिरफ्तार

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कानपुर देहात। अकबरपुर थाना पुलिस ने गुरुवार सुबह सूरज तिवारी हत्याकांड में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से हत्या में प्रयोग की गई एंबुलेंस भी बरामद की है। दोनों आरोपियों को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया है।
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थाना प्रभारी सतीश सिंह ने टीम के साथ गुरुवार सुबह 10 बजे के करीब कानपुर- झांसी हाईवे के मुखविरपुर ओवरब्रिज के पास से एंबुलेंस सवार हमरीपुर के नदीघाट निवासी देवेंद्र व अनुज सिंह उर्फ बाबा निवासी टिकरौली सिड़राडांडा थाना हमीरपुर को गिरफ्तार किया। थाना प्रभारी सतीश सिंह ने बताया कि 17 नवंबर को अकबरपुर की नई बस्ती स्वरूपपुर निवासी सूरज तिवारी को उसके पड़ोसी आशीष उर्फ राज व उसके छह साथियों ने उमरन से एंबुलेंस में बंधक बनाकर कर कानपुर के सेन पश्चिम पारा ले गए थे। वहां उसकी गोली मार कर हत्या कर दी थी और उसके घड़ी, नकदी सहित अन्य सामान लूट लिया था। 18 नवंबर को सूरज का शव पड़ा मिला था। 27 नवंबर को बारा स्थित मुरादाबादी बिरयानी दुकान के सामने से आशीष उर्फ राज, उसका मामा संजय परिहार निवासी सिरौली बुजुर्ग थाना भरुआ सुमेरपुर हमीरपुर व कल्लू उर्फ राकेश गुप्ता निवासी अमौली थाना जाफरगंज फतेहपुर को सूरज तिवारी की स्कूटी के साथ गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में सूरज की हत्या में उनके साथ आलोक, अनुज, देवेश, छंगू निवासी हमीरपुर का नाम प्रकाश में आया था। हत्या में प्रयोग की गई एंबुलेंस को सीज कर दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। मामले में शामिल शेष दो आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।





कल्लू को मोहरा बना राज ने सूरज को बुलाकर करवाई थी हत्या

- स्वरूपपुर निवासी कल्लू उर्फ राजेश गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को बताया था कि वह आशीष उर्फ राज के घर में किराए पर रहता था। राज को उसके व सूरज के बीच रुपयों के लेनदेन के बारे में भी जानकारी दी। इसपर 17 नवंबर को राज ने उसे शराब पिलाने के बाद सूरज को उधारी के रुपये वापस करवाने के नाम पर बुलवाया था। सूरज के उमरन आने पर राज के साथियों ने उसे एंबुलेंस में बंधक बना लिया था। इसके बाद कानपुर के सेन पश्चिम पारा में आलोक ने सूरज के सिर में गोली मार दी थी। इसके राज के साथियों ने सूरज का सामान भी लूट लिया था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया था कि राज व उसके दोस्तों ने रनियां के एक होटल में नौ दिनों तक रुककर घटना की शाजिस रची थी।
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