कानपुर देहात/राजपुर। भोगनीपुर वन रेंज में 10 दिन से तेंदुआ की मौजूदगी है। तेंदुआ हमला कर घोड़ा मार चुका है। बुधवार को उप प्रभागीय वनाधिकारी की अगुवाई में दो वन टीमों ने सघन कांबिंग कॉम्बिंग की हालांकि इस दौरान तेंदुआ ट्रैश नहीं हो सका। टीम ने ग्रामीणों को सतर्क किया है और समूह में लाठी डंडा लेकर निकलने की सलाह दी है।
दिबैर की मड़ैया में सबसे पहले 2 फरवरी की रात में तेंदुआ दिखाई दिया था। इसके बाद से वह गुबार और फिर जल्लापुर में दिख चुका है। सीसीटीवी फुटेज में भी जल्लापुर में तेंदुआ चहल कदमी करते कैद हुआ है। तेंदुआ को पकड़ने के लिए बीते सोमवार शाम को ही जल्लापुर में पिंजड़ा रखा गया है। हालांकि इसके बाद तेंदुआ दूसरी ओर निकल गया और हमला कर घोड़ा मार डाला। तेंदुआ के वह दस किमी के दायरे में चहल कदमी करने और घोड़ा को मार डालने की घटना के बाद से ग्रामीण अधिक डरे हैं।
उप प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्वा पांडेय की अगुवाई में वन कर्मियों की दो टीमों ने बुधवार को जल्लापुर, दमनपुर, विजहरा, पिचौरा आदि गांवों में सघन कांबिंग की। कई घंटे धूल फांकने के बाद भी वन टीमें तेंदुआ को ट्रैश नहीं कर सकीं। टीम में रेंजर स्वामीदीन, डिप्टी रेंजर गुरुनारायण, वन दरोगा आशीष कन्नौजिया, वन रक्षक इंद्रेश कुमार, कात्यायनी मिश्रा आदि रहे।
डीएफओ एके पांडेय ने बताया कि अभी कानपुर प्राणि उद्यान प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। वन टीमों की कांबिंग में तेंदुआ के पैर के निशान नहीं मिले हैं। इसकी वजह से उसकी आवाजाही की दिशा ट्रैश नहीं हो सकी है। लोगों को सतर्क किया गया है। घर के बाहर या खुले में न लेटने और समूह में हाथ में लाठी या डंडा लेकर चलने की सलाह दी गई है।