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24 घंटे के अंदर 2 किसानों ने मौत को लगाया गले, पात्र होने के बाद भी लाभ से वंचित था खेमचंद्र

Mon, 06 Aug 2018 12:14 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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मृतक किसानों की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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यूपी के महोबा जिले में चरखारी कोतवाली क्षेत्र में 24 घंटे के अंदर कर्ज से बेहाल दो किसानों ने फांसी लगा ली। इनमें एक तो कर्जमाफी योजना की पात्रता श्रेणी में भी था, लेकिन कर्ज माफ नहीं हुआ था। वह ग्रामीण बैंक का केसीसी का 80 हजार रुपये कर्जदार था। दूसरे किसान पर स्टेट बैंक का 1.50 लाख रुपये का कर्ज था। तहसीलदार परशुराम पटेल का कहना है कि आत्महत्या के मामले में परिजनों को कोई लाभ नहीं मिलता, फिर भी जांच के बाद जो  संभव होगा, मदद कराई जाएगी। 
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कर्जमाफी योजना का लाभ न पाने वाले चरखारी कस्बे के अमरगंज मोहल्ले खेमचंद्र (30) ने शनिवार की शाम को घर में ही फंदे से लटककर जान दी। छह बीघे जमीन के मालिक खेमचंद्र ने वर्ष 2010 में तीन बीघा जमीन इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में गिरवी रखकर 38 हजार का केसीसी बनवाया था। बाद में यह बढ़कर 80 हजार हो गया। परिजनों ने बताया कि कर्जमाफी की पात्रता की श्रेणी में आने के बाद भी लाभ से वंचित खेमचंद्र खासा परेशान रहते थे।
 
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जमीन बेचकर खरीदी थी क्रूजर गाड़ी

डेमो पिक
भाई मनोज के मुताबिक सूखे के चलते गुजर-बसर न होती देख खेमचंद्र ने तीन बीघे जमीन बेचकर क्रूजर गाड़ी खरीदी थी, ताकि उससे आर्थिक संकट खत्म किया जा सके, लेकिन तंगी छाई ही रही। खेमचंद्र ने जब फांसी लगाई, उनकी पत्नी उरई अपने मायके गई थी। परिवार के लोग खेत में थे। खेमचंद्र की चार संतानों में तीन बेटियां और छह माह का एक बेटा है। 

दूसरी घटना अक्ठोहा गांव में रविवार सुबह हुई। यहां किसान प्रहलाद सिंह (70) पुत्र खेम सिंह ने फांसी लगाई। परिजनों ने बताया कि प्रहलाद के पास 30 बीघे जमीन थी। उन्होंने स्टेट बैंक से डेढ़ लाख रुपये कर्ज लिया था। ऊपर से एक लाख रुपये साहूकारों से भी ले रखे थे। यहां भी घटना के समय परिवार के लोग खेतों में थे। तहसीलदार चरखारी परशुराम पटेल का कहना है कि लेखपाल, कानूनगो भेजकर जांच कराई जाएगी।
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