बकेवर। कस्बा के अस्पताल में सिर्फ दो इमरजेंसी मेडिकल चिकित्सक होने के कारण 24 घंटे इमरजेंसी सेवा की व्यवस्था ढेर है। अस्पताल प्रशासन की मांग पर पिछले सप्ताह सीएमओ स्तर से जिला अस्पताल के डॉ. रितिक को यहां संबद्ध किया लेकिन उनकी ज्वाइनिंग ही नहीं हुई। इसके बाद अब उनकी संबद्धता भी रद्द कर दी गई है। ऐसे में अस्पताल की समस्या जस की तस बनी हुई है।
कस्बा बकेवर के 50 शैया अस्पताल में तैनात दो ईएमओ चिकित्सकों के भरोसे 24 घंटे की आपातकालीन सेवा चल रही है। यही कारण है कि कई बार रात के समय इमरजेंसी के मारीज को देखने के लिए कोई डाॅक्टर नहीं होता और स्टाफ नर्स ही मरीज को इलाज देते हैं। इसके अलावा अस्पताल में स्टाफ नर्स व फार्मासिस्ट की भी कमी है। अस्पताल में आस पास के 10 से 15 किमी दूरी तक के मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। इमरजेंसी में भी प्रतिदिन कई मरीज यहां इलाज के लिए ले जाए जाते हैं। अस्पताल में सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी चलती है। उसके बाद दोपहर दो से रात आठ व रात आठ से सुबह आठ बजे तक इमरजेंसी सेवा चलती है। इमरजेंसी में यहां तैनात ईएमओ डॉ. रविंद्र साहू व डॉ. सतेंद्र साहू की बारी बारी से डयूटी लगाई जाती है।
जबकि शासन ने दो साल पहले अस्पताल में तीन इमरजेंसी मेडिकल चिकित्सकों की नियुक्ति की थी। इसमें एक ईएमओ डॉक्टर रविंद्र भदौरिया का छह माह बाद ही स्थानांतरण फिरोजाबाद हो गया था। उसके बाद अस्पताल से अस्पताल में सिर्फ दो ईएमओ ही बचे हैं। अस्पताल नेशनल हाइवे के किनारे होने के कारण हर रोज कई दुर्घटना के घायल मरीज भी यहां पर लाए जाते हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण इनमें से ज्यादातर घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल प्रशासन की बार बार मांग के बाद सीएमओ बृजेंद्र कुमार सिंह ने जिला अस्पताल के डॉ रितिक को बकेवर संबद्ध कर दिया लेकिन वह ज्वाइन करने ही नहीं पहुंचे। चार दिन बाद उनका संबद्धता आदेश भी निरस्त कर दिया गया। यही कारण है कि आज भी इमरजेंसी के मरीजों को अस्पताल में कई बार इलाज नहीं मिल पाता है।