फास्ट ट्रैक कोर्ट ने लिंग परीक्षण, कन्या भ्रूण हत्या, फर्जीवाड़ा के आरोपी दो डॉक्टर और फार्मेसिस्ट को आरोपमुक्त कर दिया है। फरवरी 2013 में तत्कालीन एसएसपी के आदेश के बाद स्टिंग आपरेशन के आधार पर इन डॉक्टरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। शहर का चर्चित स्टिंग आपरेशन कोर्ट में ठहर नहीं सका।
23 फरवरी 2013 को विश्व बैंक कालोनी बर्रा निवासी समाजसेवी संजय सिंह ने कल्याणपुर थाने में कन्हैया लाल हॉस्पिटल के डॉ. अजय पांडेय और रतनदीप हॉस्पिटल के कर्मचारी संजय पांडेय (बाद में पुलिस ने विवेचना में संजय विश्वकर्मा नाम खोला था) और काकादेव थाने में डॉ. विनायक माथुर, डॉ. अजय पांडेय और संजय पांडेय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
आरोप था कि यह सभी लोग तीन हजार रुपये देने पर लिंग परीक्षण करने और कन्या का भ्रूण निकलने पर गर्भपात करने को तैयार हो गए थे। अधिवक्ता आनंद सेट्टी ने बताया कि यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा था। कोर्ट ने सभी अभियुक्तों को आरोपमुक्त करने का आदेश दिया।
आदेश में कहा गया है कि सत्यता की जांच करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। केस डायरी में दर्ज अधिकांश बयानों में सुनी-सुनाई बातों के आधार पर कथन किया गया है। एक्ट के अंतर्गत अपराध केसंबंध में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय करने का कोई आधार नहीं है।