ऑनलाइन जुड़े जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने रामायण के मूल्यों को समझाया। उन्होंने रामायण को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही। कहा कि रामायण राष्ट्र की धरोहर है। गंगोत्री से गंगासागर तक, कश्मीर से कन्याकुमारी तक राम हर मानव के मन में हैं। मुख्य अतिथि सतीश महाना ने कहा कि श्रीराम के जीवन से विनम्रता, शीतलता, शिष्यों का अपने गुरु के प्रति समर्पण और परंपरा की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विश्वगुरु बनेगा।
इस कार्यक्रम में सिया राम रूप, भक्ति गायन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। सियाराम रूप प्रतियोगिता में सिया के रूप में आईना कपूर, राम के रूम में प्रियंवदा, सौम्या, ऋषभ यादव व अनुराग शुक्ला, लक्ष्मण के रूम में अभय दीक्षित, हुनमान के रूप में अंश गुप्ता प्रतिभाग किया। कॉन्क्लेव में रामायण गान, भजन, निबंध प्रतियोगिताएं भी हुईं।
रामायण की जगह मूर्ख लेखकों की किताबें अधिक पढ़ी जातीं
स्वामी मिथिलेश नंदिनी ने युवाओं को वाल्मिकी रामायण से आत्मसात होने की बात कही। कहा कि दुख होता है कि देश में रामायण की जगह मूर्ख लेखकों की किताबों को ज्यादा पढ़ा जाता है। उनकी किताबों को बेस्ट सेलिंग का खिताब मिलता है, जबकि उनके पास कोई अधिकारिक ज्ञान नहीं है। रामायण मनुष्य की सभी गुणों को असाधारण तरीके से अपने भीतर समाहित किए हुए है। उन्होंने छात्रों को भारत की संस्कृति की ओर मुड़ने को कहा। विद्या मनुष्य को मनुष्य बनाती है।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमेश चिंतक ने कहा कि शिक्षा और विद्या में अंतर होता है। विद्या मनुष्य को मनुष्य बनाती है। विद्यालय का अर्थ छात्रों को संस्कार देना, आत्मा को परमात्मा से जोड़ना होता है। शिक्षण संस्थानों में अभी तक दी जाने वाली शिक्षा से छात्रों को केवल धनोपार्जन करना ही सिखाया जाता है। विवि की इस अनूठी पहल ने संस्थान को वास्तव में विद्यालय बना दिया।