डॉक्टर उदय नाथ का बोर्ड हटाते अर्दली राजेश, डॉक्टर उदय नाथ व डॉ. हरिदत्त नेमी
- फोटो : अमर उजाला
दो सीएमओ के चक्कर में बुधवार को पूरा दफ्तर अस्त-व्यस्त रहा। दो धड़ों में बंटा दफ्तर का स्टाफ यह समझ नहीं पा रहा था कि फाइलें लेकर किसके पास जाएं। एसीएमओ, डिप्टी सीएमओ स्तर के अधिकारी दोनों सीएमओ के पास गए। वहीं फाइलों को लेकर स्टाफ ने दोनों सीएमओ की अनसुनी कर दी। एक-दो लिपिक स्तर के कर्मियों को नरमी के साथ चेतावनी भी दी गई।
सीएमओ डॉ. उदयनाथ ने कहा कि आज कोई काम नहीं हो पाया। शासन के आदेश का इंतजार रहा है। वहीं, सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने कहा कि कुछ शिकायतें और कुछ जांच के मामले आए, उन पर निर्देश दिए गए। 10-12 शिकायतों का निस्तारण किया। दो सीएमओ के बीच फंसे रहने के कारण सीएचसी, पीएचसी और स्वास्थ्य केंद्रों के निरीक्षण का कार्य भी बाधित रहा। स्वास्थ्य अधिकारी दोनों सीएमओ में से किसी का भी नाम लेने में कतराते रहे। उनका कहना था कि बड़े अधिकारियों का मामला है।
पूर्व सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी जॉइन करने पहुंचे, सूचना पर पहुंची पुलिस बल
- फोटो : अमर उजाला
हम तो अपने काम से काम रखते हैं लेकिन अंदरखाने वे दोनों को साधने के चक्कर में रहे। यह तय नहीं रहा कि शासन का आदेश किसके पक्ष में रहेगा। इस दौरान डॉ. सुबोध प्रकाश आए लेकिन डॉ. उदयनाथ के पास बैठे रहे। डॉ. सुबोध पर डॉ. नेमी ने आरोप लगाया था। एसीएमओ डॉ. आरएन सिंह सीएमओ कार्यालय में नहीं दिखे।
सीएमओ कार्यालय में तत्कालीन सीएमओ डॉक्टर उदय नाथ का बोर्ड हटाया गया
- फोटो : अमर उजाला
सीएमओ कार्यालय में काम से आए कुछ लोग पुलिस देखकर और विवाद की जानकारी मिलने के बाद लौट गए। सीएमओ डॉ. नेमी ने कहा कि वह पूरे समय दफ्तर में बैठे, इसके बाद वहां से आए हैं। दूसरी तरफ सीएमओ डॉ. उदयनाथ करीब 1.30 बजे ऑफिस से कोई काम बताकर चले गए। इसके बाद कर्मचारी ने उनके नाम का बोर्ड हटा दिया। यह बताया गया कि डॉ. नेमी का बोर्ड बन रहा है। गुरुवार को लगाया जाएगा। आला अधिकारी इस संबंध में बात करने से कतराते रहे। अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. संजू अग्रवाल ने कहा कि फोन लगातार नो रिप्लाई रहा।
सीएमओ ऑफिस से निकलते डॉक्टर उदयनाथ
- फोटो : अमर उजाला
याचिका में पार्टी होने की वजह से कतराए अफसर
हाईकोर्ट में सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी की ओर से जो याचिका दायर की गई थी उसमें डीएम, डीजी और प्रमुख सचिव भी पार्टी रहे हैं। विभागीय सूत्रों का कहना था कि इसी वजह से इस मामले में किसी अफसर ने दखल नहीं दिया। विभागीय आला अधिकारियों ने फोन करके भी हस्तक्षेप नहीं किया।