चित्रकूट जिला अस्पताल में जुड़वां बच्चों की हालत खराब होने पर इलाज के लिए लाए परिजन डाक्टर व स्टाफ को ढूंढते रह गए। काफी देर तक उनका इलाज न हुआ तो निराश होकर लौट गए। इसमें एक बच्चे की हालत बेहद नाजुक हो गई थी जिससे परिजन रोते हुए टेंपो में बैठकर रवाना हुए।
राजापुर के डुडौली गांव निवासी शकुंतला देवी ने बताया कि उसकी बहू मंजू पांडेय पत्नी चंद्रप्रकाश ने तीन दिन पूर्व जानकीकुंड अस्पताल में जुड़वां बच्चों को जना है। अस्पताल से परिजन जच्चा-बच्चा को लेकर गांव चले गए। शनिवार की सुबह दोनों बच्चों की हालत अचानक खराब हो गई। परिजन दोपहर जिला अस्पताल पहुंचे। शकुंतला देवी ने आरोप लगाया कि लगभग आधे घंटे तक व बच्चों को लेकर अस्पताल में इलाज के लिए भटकते रहे। पर्चा बनाने वाले ने बताया कि समय समाप्त हो गया है। चेंबर में डाक्टर नहीं थे।
कुछ अस्पताल के लोगों से पूंछा तो बताया कि अब आज का समय समाप्त हो गया है सभी चले गए हैं। बच्चों का इलाज नहीं हो पाएगा। काफी देर तक परिजन भटकते रहे इस दौरान एक बच्चे की हालत बेहद नाजुक हो गई इसके बाद परिजन लौट गए। इस मामले में सीएमएस डा.एसएन मिश्रा ने बताया कि उनकी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। जिस समय की बात बताई जा रही है उस समय तो दो लेडी डाक्टर भी अस्पताल में थीं। लेकिन किसी परिजन ने इलाज न किए जाने की शिकायत नहीं की।