जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. आरती लाल चंदानी के बांदा तबादले के प्रकरण की बुधवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में शासन की ओर से एडिशनल अटार्नी जनरल ने रिटायरमेंट की आयु पांच साल बढ़ाने और बांदा में 13-14 लेक्चरर की नियुक्ति का हवाला देकर सरकार के फैसले को सही ठहराने की कोशिश की।
डॉ. चंदानी के वकील ने बिना विभागीय मंत्री के अनुमोदन और सत्र के बीच में ट्रांसफर पर सवाल उठा दिए तो एडिशनल अटार्नी जनरल निरुत्तर हो गए। उन्होंने कोर्ट से कुछ वक्त मांगा।
अब हाईकोर्ट ने सरकार को अपना पक्ष रखने को 18 फरवरी का समय दिया है। बुधवार को जस्टिस दिलीप कुमार और श्रीनारायण शुक्ल की पीठ ने डॉ. आरती लाल चंदानी तबादला प्रकरण की सुनवाई शुरू की।
डॉ. चंदानी के अधिवक्ता आरएस मिश्र और संतोष बाजपेई ने आठ माह के बाद उनके रिटायरमेंट, बांदा में पढ़ाई की कोई व्यवस्था और बीच सत्र ट्रांसफर पर सवाल उठाए।
सरकार की ओर से एडिशनल अटार्नी जनरल ने बताया कि मेडिकल टीचरों की रिटायरमेंट आयु पांच साल बढ़ा दी गई है और बांदा में 13-14 लेक्चरर की नियुक्ति भी कर दी गई है। इसलिए इन दोनों आपत्तियों का कोई मतलब नहीं है।
इसके बाद डॉ. चंदानी के अधिवक्ता ने कहा कि बीच सीजन बिना विभागीय मंत्री की अनुमति ट्रांसफर नियम विरुद्ध है। इस पर कोर्ट से समय मांगा गया। बता दें कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री खुद सीएम अखिलेश सिंह यादव हैं। डॉ. चंदानी के ऑर्डर में उनके अनुमोदन का कोई जिक्र नहीं है।