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Kanpur News: सेवानिवृत्त के बचे तीन महीने दूसरे शहरों में कर दिया तबादला

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कानपुर। झांसी में अफसरों के घूसकांड के बाद सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) कार्यालय एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। विभाग के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया गया है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन संकट के चलते वर्कफ्राम होम की अपील की है। उसी बीच विभाग के उच्च अफसरों ने 12 मई को 354 सुपरिटेंडेंट, 102 इंस्पेक्टरों के तबादले कर दिए। इसके अलावा 23 अप्रैल को 32 सहायक आयुक्तों का तबादला किया जा चुका है। जिन अफसरों की सेवानिवृत्त के तीन से चार महीने बचे हैं उन्हें भी दूसरे शहरों में भेज दिया गया है। जबकि कई अफसर 15-15 सालों से एक ही जिले में जमे हुए हैं। इस पर अफसरों ने नाराजगी जताई है।
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कानपुर, आगरा, लखनऊ, इलाहाबाद कमिश्नरी से जुड़े शहरों के अफसरों के तबादलाें नेे उच्च अफसरों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल तबादलों में नियमों को दरकिनार किया गया। कई अफसरों के पूर्व में प्रमोशन हुए थे तब उनका तबादला नहीं किया गया लेकिन अब तबादला कर दिया गया। नियमानुसार तबादला नहीं किया जाना था। सूत्रों ने बताया कि तबादला लिस्ट जारी करने के बाद उच्च अफसर अवकाश पर चले गए। कानपुर के 66 सुपरिटेंडेंट, 17 इंस्पेक्टर समेत 83 का तबादला हुआ है। नौ असिस्टेंट कमिश्नर यहां आए हैं।


करोड़ों की लगेगी चपत
कानपुर। अफसरों के तबादलों होने और संबंधित जगह पहुंचने पर टीटीए दिया जाता है। एक अधिकारी पर कम से कम एक लाख का खर्च आएगा। इस प्रकार कई करोड़ के राजस्व का भी नुकसान होगा। कानपुर शहर के पूर्व कमिश्नर रोशन लाल का भी तबादला कर दिया गया है। उन्हें ऑडिट में भेजा गया है।
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