कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग के डाउन ट्रैक पर रेलवे ने बुधवार को आठ घंटे का ब्लॉक लिया। इस दौरान इस रूट के ऊपर से निकाले जा रहे गंगा एक्सप्रेस ब्रिज के गर्डर रखे गए। इस वजह से कई ट्रेनें घंटों देरी से चलीं तो कई के रूट बदले गए। जानकारी न होने से यात्री भी परेशान रहे। वहीं लोकमान्य तिलक टर्मिनल का बुधवार को रूट बदला होने से कुछ देर के लिए अफरातफरी भी रही।
कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग स्थित पुल संख्या 77 पर गर्डर रखने का सुबह 10 बजे से ब्लॉक लेकर शुरू कराया गया। सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक चार गर्डर रखे गए। गंगा एक्सप्रेसवे के इंजीनियर संजीव तिवारी ने बताया कि इस एक्सप्रेसवे के लिए कुल 18 स्टील गर्डर रेलवे ट्रैक के ऊपर से रखे जाने हैं। पहले दिन के ब्लॉक में चार गर्डर रखे गए हैं। आने वाले दिनों में जैसे ही ब्लॉक मिलेगा अन्य गर्डर रखवाए जाएंगे।
उधर, इसी रूट पर सोनिक के पास स्थित ब्रिटिशकालीन बसहा पुल पर रेलवे ने मरम्मत का काम कराया। इससे शाम छह बजे तक डाउन ट्रैक प्रभावित रहा। शाम 5:23 बजे 12173 लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस उन्नाव स्टेशन पहुंची। ट्रेन के रुकते ही लखनऊ जाने वाले यात्री ट्रेन पर बैठने लगे। लेकिन जीआरपी पुलिस व अनाउंसमेंट के जरिए उन्हें जानकारी दी गई कि यह ट्रेन रायबरेली, प्रतापगढ़, होकर लखनऊ पहुंचेगी। इससे यात्री रुक गए और ट्रेन पर बैठ चुके नीचे आ गए।
इसके अलावा 64212 मेमू ट्रेन पांच घंटे देर से (दोपहर 12:20 के बजाए शाम 05:20 बजे) कानपुर से चली। इसी ट्रेन से लखनऊ जाने वाले यात्री गंतव्य तक पहुंचे। हालांकि काफी देर तक उन्हें इंतजार करना पड़ा। इसके अलावा 15066 पनवेल एक्सप्रेस और 12103 पुणे एक्सप्रेस भी तीन घंटा देरी से चलीं। स्टेशन मास्टर सुधांशु मोहन ने बताया कि ब्रिज पर काम के कारण ट्रेनें देरी से चली।