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ट्रैफिक जाम बढ़ा रहा ब्लड शुगर लेवल: बढ़ जाते हैं ग्रोथ हारमोंस, नष्ट होती हैं बीटा सेल

Tue, 06 Jul 2021 05:03 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर का ट्रैफिक - फोटो : amar ujala
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कानपुर शहर के लिए नासूर बना जाम लोगों को बीमार कर रहा है। जाम फंसकर शहरियों की ब्लड शुगर हाई हो जा रही है। इससे शरीर के दूसरे अंगों पर असर आ रहा है। खासतौर पर जाम में फंसने पर पोस्ट कोविड रोगियों को और अधिक खतरा हो जाता है। यह बात विभिन्न अध्ययनों से साबित हुई है। जांच में लोगों की ब्लड शुगर बढ़ी मिली है।
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साथ ही लोगों का स्ट्रेस लेवल भी बढ़ा पाया गया। लगातार जाम में फंसने वाले लोग जल्दी डायबिटिक हो जाते हैं। डायबेटोलॉजिस्टों के एक वेबिनार में जाम को लेकर प्रस्तुत किए गए विभिन्न अध्ययनों के हवाले से कानपुर डायबिटीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ब्रजमोहन ने बताया कि जाम में फंसने पर व्यक्ति को स्ट्रेस होता है। इससे उसके अंदर एडरीनलीन, नॉर एडरीनलीन और दूसरे ग्रोथ हारमोंस का रिसाव होता है। इनसे ब्लड शुगर बढ़ने लगती है। साथ ही पैंक्रियाज की बीटा सेल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बीटा सेल नष्ट हो जाती है। इससे इंसुलिन का रिसाव प्रभावित होता है और खून में ब्लड शुगर हाई हो जाती है।

पोस्ट कोविड रोगियों के लिए घातक
जाम फंसने पर पोस्ट कोविड रोगियों की हालत बिगड़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि जाम के स्ट्रेस से ब्लड शुगर तो बढ़ती है, वाहनों के एक जगह देर तक खड़े रहने से वहां के वातावरण में धुएं का जमाव बढ़ जाता है। इससे नुकसानदेह तत्व सांस लेते ही शरीर के अंदर चले जाते हैं। यह स्थिति रोगी के लिए घातक हो जाती है। जाम में फंसे गंभीर रोगी की मौत हो सकती है। पैंक्रियाज के अलावा इसका नुकसान शरीर के दूसरे अंगों को होता है। इसमें हृदय, मस्तिष्क और फेफड़े प्रभावित होते हैं। पोस्ट कोविड रोगियों को इन्हीं अंगों की तकलीफ होती है।
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यह भी भी होती हैं दिक्कतें
- माइग्रेन के रोगी के सिरदर्द में तेजी आती है।
- ब्लड सर्कुलेशन पर असर से बढ़ता है बीपी।
- अस्थमा, सीओपीडी के रोगी पड़ सकता है अटैक।
- स्ट्रेस से गैस की दिक्कत होती है, आ सकती बेहोशी।
- डिप्रेशन के रोगी को होने लगती है घबराहट।
- उठ सकता है एंजाइना का दर्द।

केस : 1
मंधना क्षेत्र के रहने वाले रामआसरे (61) को अस्थमा अटैक पड़ा था। कल्याणपुर तिराहे पर जाम में उनका वाहन फंस गया। आसपास बढ़ रहे धुएं से उनकी तबियत और बिगड़ गई। जब तक परिजन उन्हें लेकर डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल पहुंचते मौत हो गई।

केस : 2
काकादेव के रहने वाले रमेश कुमार (54) रावतपुर स्टेशन के पास जाम में फंसे थे। पांच-छह मिनट बाद उन्हें चक्कर आने लगा। इसके बाद वह बेहोश हो गए। परिचित उन्हें लेकर हैलट इमरजेंसी पहुंचे। जांच में ब्लड शुगर 430 निकली। वह बताते हैं कि नाश्ते के पहले ब्लड शुगर 120 थी।
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