कानपुर। यातायात की बिगड़ी चाल मानसिक तनाव, अवसाद और चिंता बढ़ाने का छठवां सबसे बड़ा कारण बन गया है। विश्व स्तर पर हुए शोध में यह खुलासा हुआ है। इस पर अवसाद बढ़ाने के प्रमुख कारणों में इसे भी जोड़ दिया गया। यातायात की चिंता लोगों को सोते वक्त भी सताती है और जब उन्हें बाहर निकलना होता है तो तनाव अधिक बढ़ जाता है। इससे लोग अवसाद की गिरफ्त में आ जाते हैं।
यह बात मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया से आए वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन शुक्ला ने यह बात बताई। डॉ. शुक्ला जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज पुरातन छात्र हैं। एमबीबीएस बैच, वर्ष 1995 पैरा पी-1 की सिल्वर जुबली में शिरकत करने आए डॉ. नितिन ने बताया कि अवसाद और एंजाइटी बढ़ाने में पहले पांच प्रमुख कारण रहे हैं। इनमें कॅरिअर, आपसी रिश्तों का द्वंद्व, वित्तीय स्थिति, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की खराबी और सामाजिक संबंध रहे हैं। नया छठवां कारण यातायात इसमें जुड़ गया है।
उन्होंने बताया कि शोध रिपोर्ट में बताया गया कि व्यक्ति इस चिंता में रहता है कि पता नहीं कल ट्रैफिक जाम में उसका कितना समय लगेगा। बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने, ऑफिस या किसी कार्य के लिए आने-जाने के लिए किए गए समय के प्रबंधन को ट्रैफिक बिगाड़ देता है। घर से बाहर निकलने वाला लगभग हर व्यक्ति ट्रैफिक के तनाव से जूझता है। ट्रैफिक बीतने वाला समय तनाव से भरा रहता है। उन्होंने बताया कि अब ट्रैफिक जीवन प्रभावित कर रहा है। अवसाद, एंजाइटी और तनाव के रोगियों की डायग्नोसिस तैयार करने में अब उनके बाहर आने-जाने का ब्योरा भी लिया जाता है।
डॉ. नितिन शुक्ला ने बताया कि मनोरोग दूर करने में हिप्नो थैरेपी अपनाई जा रही है। कन्वरसेशनल हिप्नोसिस से रोगी के मर्ज का कारण पता किया जाता है। बोरियत दूर करने के लिए नई पीढ़ी सबसे ज्यादा शराब पीती है। घबराहट दूर करने के लिए नशे का इस्तेमाल किया जाता है। ऑस्ट्रेलिया में 12 से 25 साल के युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे अधिक ध्यान दिया जा रहा। लोग इंटरनेट देखते हैं और दूसरों की नकल कर नशे का सेवन करते हैं।