कानपुर। सरकार ने पहलगाम हमले का जवाब देना शुरू कर दिया है। सिंधु नदी का पानी रोकना धीरे फटने वाले परमाणु बम जैसा है, जिसमें आवाज नहीं है। सरकार ने तय कर लिया है कि उसे क्या करना है। 96 घंटे की कार्रवाई भी बहुत बड़ी हो सकती है। जिहाद और जिहादियों की मानसिकता को खत्म का समय आ गया है। मर्चेंट्स चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश कानपुर की ओर से चैंबर सभागार में इंटेलीजेंस इन एक्शन : इंडियास स्ट्रेटेजिक मनेउवर इन जियोपॉलिटिकल डायनामिक्स विषय पर आयोजित टॉक शो में यह बातें पूर्व सैन्य अफसरों ने कहीं।
पूर्व रॉ अधिकारी कर्नल आरएसएन सिंह ने कहा कि एक्शन हमेशा सेना का नहीं होता है। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो यह भ्रम है। पूरे देश को एकजुट होकर लड़ना होगा। कहा कि पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति अत्यंत जर्जर है। वह सीधे युद्ध लड़ने में सक्षम नहीं है। वह भारत में सांप्रदायिक तनाव फैलाने के उद्देश्य से हिंदुओं पर हमलाकर ‘एंटी-हिंदू’ वातावरण बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत को ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए कि यदि कोई ऐसी घटना करने की सोच रखे तो उसके मन में पहले ही इसके दुष्परिणाम बैठ जाएं। उन्होंने कहा कि संगीनों के साए में पर्यटन नहीं बढ़ सकता है। भारत विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था से तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की ओर चल रहा है।
कर्नल अजय के रैना ने कहा कि कश्मीर की समस्या को पूर्व में किसी ने समझा नहीं और न ही निर्णय लिए गए। इससे वहां आतंकवाद पनपा। पाकिस्तान में ऐसे तत्व हैं, जो भारत को खत्म करना चाहते हैं। पाकिस्तान ने अराजकता, आतंकवाद और रुकावट के अलावा कुछ नहीं दिया। पाकिस्तान ऐेसा क्यों करता है, उसकी मानसिकता, इतिहास पर टाॅक शो में चर्चा की गई।
इससे पहले चैंबर के अध्यक्ष अभिषेक सिंहानिया ने आयोजन के उद्देश्य और विषय की प्रासंगिकता की जानकारी दी। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ। यहां पर अजय कुमार सरावगी, महेंद्र मोदी, डॉ. आईएम रोहतगी, बीके लाहोटी, वर्षा सिंंहानिया, मुकुल टंडन, अनिल अग्रवाल, विजय पांडे, आशीष चौहान, स्वतंत्र सिंह, तरुण गर्ग, सुशील शर्मा, मनीष कटारिया आदि थे।
कानपुर। आदी अचिंत ने कहा कि नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी ने पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव, श्रीलंका को आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया। दरअसल नोटबंदी से इन देशों में बैठे आका नकली भारतीय नोटों की खेप नहीं ला पाए। इसके परिणाम सबके सामने हैं। कहा कि भारत बहुआयामी दृष्टिकोण के साथ कठोर, लेकिन संतुलित नीतियां अपनाकर न केवल सीमाओं की सुरक्षा कर रहा है। बल्कि, आंतरिक स्थिरता बनाए रखने में भी सफल हो रहा है।