कानपुर देहात का बारा टोल प्लाजा और एजीएम मनोज शर्मा
जिला प्रशासन और भाजपा नेताओं पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कानपुर देहात बारा जोड़ टोल प्लाजा के एजीएम मनोज शर्मा ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा ओरिएंटल कंपनी को भेजा है। कहा कि जब तक प्रशासन उनकी मदद नहीं करेगा, उनका यहां काम असंभव है। इस बारे में डीएम कुमार रविकांत सिंह ने कोई जानकारी होने से इनकार किया है।
एजीएम ने प्रदेश में नई सरकार बनते ही भाजपाइयों पर दबंगई दिखाने का आरोप मढ़ा। कहा कि ये लोग अपनी गाड़ियां फ्री पास करवाने को लिस्ट भेज रहे हैं। प्रमाण के तौर पर उन्होंने कई नेताओं की लिस्ट अपने पास रखी है। बताया कि पहले सपाई दबाव बनाते थे, अब यह काम भाजपाई कर रहे हैं। हर साल टोल प्लाजा एक करोड़ रुपये के घाटे में जा रहा है। उच्चाधिकारियों को भेजे पत्र में उन्होंने कहा कि गाड़ियां निकालने को लेकर हर दिन दबंगई की जाती है, इससे वह भयभीत हैं।
एनएच-2 पर मार्च 2013 में स्थापित टोल प्लाजा का ठेका ओरिएंटल कंपनी के पास है। टोल की ही आय से कंपनी को इटावा से चकेरी तक सिक्स लेन बनाना है। इसके लिए कंपनी ने 1900 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। एजीएम ने बताया कि टोल से प्रतिदिन 19 हजार वाहन पास होते हैं। इससे करीब 30 लाख रुपये की आय होती है। पिछले 11 माह से जिला प्रशासन व नेताओं ने हद कर रखी है। एक हजार से अधिक गाड़ियां रोजाना दबंगई के बल पर निकलवाई जा रही हैं। इसमें तीन सौ पुलिस की और तीन सौ जिला प्रशासन की हैं।
कई बार गाड़ियां निकालने को लेकर लोग मारपीट करते हैं। प्रशासन उनकी मदद नहीं करता। एजीएम ने नोटबंदी के दौरान लगे वसूली के आरोप पर कहा कि जिला प्रशासन ने दबाव बनाने के लिए उन पर शांतिभंग का मुकदमा लिखवा दिया। इसके लिए पांच लाख रुपये का मुचलका भरवाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी अधिकारी से शांति का खतरा कैसे हो गया।
भाजपा सांसद ने कहा कि ज्यादा कुछ नहीं बोलूंगा
एजीएम के इस्तीफे की खबर के बाद अकबरपुर रनियां के भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने कहा कि ज्यादा कुछ नहीं बोलूंगा, लेकिन यह टोल पूर्णतया गलत बना हुआ है। मंजूरी एनएच- 2 के लिए है लेकिन एनएच- 25 का भी चार्ज वसूला जा रहा है। मंत्रालय में बात चल रही है कि कंपनी से रिकवरी तक होगी।