गाड़ी के टायर बता देंगे कि वे फटने वाले हैं
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टायर फटने से होने वाले हादसों पर अब अंकुश लग सकेगा। परिवहन मंत्रालय जल्द ही गाड़ियों (चार पहिया व सभी भारी वाहन) में टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (टीपीएमएस) लगवाना अनिवार्य करने जा रहा है। उम्मीद है कि नई सरकार के गठन के बाद यह नियम लागू कर दिया जाएगा।
यह सेंसर युक्त एक तकनीक है, जो टायर में हवा का दबाव और तापमान बढ़ने पर अलर्ट कर देगी। मंगलवार तड़के ही चकेरी हाईवे पर एक एंबुलेंस टायर फटने से अनियंत्रित होकर ट्रक से टकरा गई थी। इसमें दो साल के मासूम समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी।
टायर फटने की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ही ऑटोमेटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) ने गाड़ियों में टीपीएमएस लगवाने के मानक 29 अप्रैल को जारी किए हैं। इन मानकों को केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्वीकार कर लिया है और इसका नोटिफिकेशन जारी भी कर दिया है।
इसके लिए कंपनियां 12,990 रुपये अतिरिक्त चार्ज ले रही हैं
एचबीटीयू के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रो. आनंद कुमार ने बताया कि नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद इसका कानून लाकर लागू कर दिया जाएगा। हालांकि इसके पहले ही गाड़ियां बनाने वाली कंपनियों ने इसे ऑप्शनल एक्सेसरीज के तौर पर ग्राहकों को देना भी शुरू कर दिया है। प्रो. आनंद के मुताबिक मारुति और टोयोटा जैसी कंपनियों ने छोटी कारों में टीपीएमएस इंस्टॉल करना शुरू कर दिया है। इसके लिए कंपनियां 12,990 रुपये अतिरिक्त चार्ज ले रही हैं।
प्रो. आनंद कुमार ने बताया कि टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम में पांच सेंसर और एक बॉक्सनुमा डिस्पले स्क्रीन शामिल है। वाल्वनुमा चार सेंसर पहियों में लगाए जाएंगे, जबकि एक सेंसर इंजन में होगा। टायर में लगे सेंसर हवा का दबाव, तापमान, कट, पंचर या किसी भी दूसरे तरह की खराबी पकड़ेंगे जबकि पांचवां सेंसर इंजन पर पड़ने वाले दबाव की जानकारी देगा। इससे ड्राइवर को किसी भी अनहोनी से पहले जानकारी मिल जाएगी और वह वाहन रोककर खामियों को दूर कर सकेगा।
कंपनियों व आम लोगों से इस पर राय मांगी गई थी
प्रो. आनंद कुमार के मुताबिक टायर फटने से होने वाली दुर्घटनाएं रोकने के लिए सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने एआरएआई पुणे की निदेशक उर्धवारिषी की अध्यक्षता में ऑटोमेटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने सिस्टम डेवलपमेंट, टेस्टिंग, सिंबल निर्धारण और फिर उसे लागू करने की प्रक्रिया को लेकर एआरएआई के विशेषज्ञों की 11 सदस्यीय टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (टीपीएमएस) कमेटी गठित की थी। दो साल तक अध्ययन और शोध के बाद इस कमेटी ने पिछले साल 2018 में इस हाईटेक तकनीक को अनिवार्य करने की सिफारिश कर दी थी।
टीपीएमएस की सुझाव के बाद मंत्रालय ने गाड़ियां तैयार करने वाली कंपनियों, टायर तैयार करने वाली कंपनियों व आम लोगों से इस पर राय मांगी थी। मंत्रालय को इस बाबत बड़ी संख्या में लोगों ने सुझाव भेजे थे। सभी का अध्ययन करने के बाद इसे लागू करने का फैसला लिया गया है।