मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़
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कानपुर। बार एसोसिएशन और लायर्स एसोसिएशन की संयुक्त कार्यकारिणी की बैठक में तीन वकीलों को निष्कासित करने का अहम फैसला लिया गया। इन तीनों वकीलों के दोनों एसोसिएशन दफ्तर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। अमर्यादित आचरण की शिकायत बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को पत्र भेजकर की जाएगी।
इन वकीलों को सेंट्रल बार एसोसिएशन और यंग लायर्स एसोसिएशन चलाने पर आपत्ति जताते हुए नोटिस दी गई थी। इनके जवाब से असंतुष्ट बार और लायर्स एसोसिएशन ने पहली बार इस तरह के मामले में बड़ी कार्यवाही की है। निष्कासित किए वकीलों में राम कृष्ण अवस्थी 1992 से 1994 तक लायर्स एसोसिएशन अध्यक्ष और 1995-1996 में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे हैं। ‘अमर उजाला’ चार अप्रैल को कोर्ट परिसर और कलक्ट्रेट में हुई तोड़फोड़ पर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद से ही पूरे मामले पर नजर रखे हुए था।
बार और लायर्स एसोसिएशन ने सात वकीलों को संस्थाएं चलाने पर नोटिस दिए थे। दोनों एसोसिएशन ने पांच वकीलों के जवाब को संतोषजनक माना था। सेंट्रल बार एसोसिएशन अध्यक्ष रामकृष्ण अवस्थी और महामंत्री प्रवीण फाइटर के जवाब पर दोनों एसोसिएशन ने आपत्ति जताते हुए गंभीरता जताई थी। यंग लायर्स एसोसिएशन के महामंत्री रतन अग्रवाल को सोशल मीडिया पर दोनों एसोसिएशन के खिलाफ बयानबाजी का दोषी करार दिया गया था। मंगलवार शाम बार एसोसिएशन अध्यक्ष हरि प्रसाद यादव, महामंत्री संदीप सिंह, लायर्स एसोसिएशन अध्यक्ष रवि शंकर बाजपेई, महामंत्री आरएन सिंह समेत दोनों कार्यकारिणी की बैठक बार एसोसिएशन हाॅल में हुई। दोनों महामंत्रियों ने बताया कि बैठक में बहुमत से राम कृष्ण अवस्थी, प्रवीण फाइटर और रतन अग्रवाल को निष्कासित करने का फैसला लिया गया।