कटरी के कन्हवापुर में बाघिन को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजड़े में रविवार की रात बाघिन ने कदम रखा, लेकिन पिंजड़े का मैकेनिज्म ऑन नहीं होने से उसने अंदर रखे गोश्त को खाया और आराम से वापस चली गई।
ऐसा भूलवश नहीं हुआ है बल्कि यह बाघिन को पकड़ने के लिए पिछले एक माह से जद्दोजहद कर रही वन विभाग टीम की सोची समझी प्लानिंग का हिस्सा है।
इस बाबत वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट के डॉ. सौरभ संघई का कहना है कि ऐसा करने से जानवर का पिंजड़े से डर खत्म हो जाता है। पिंजड़े के अंदर बाघिन के पैरों के निशान देखकर पुख्ता हो गया है कि अब वो दोबारा भी पिंजड़े के अंदर शिकार तलाशने आएगी।
इसलिए अब पिंजड़े का मैकेनिज्म ऑन कर दिया गया है, यदि सोमवार की रात बाघिन ने पिंजड़े में प्रवेश किया तो उसके अंदर जाते ही एक सेकेंड बाद पिंजड़ा स्वत: बंद हो जाएगा।
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि बाघ बेहद चालक होता है। इसलिए उसके अंदर पिंजड़े का डर खत्म कर उसे विश्वास में लेकर पकड़ा जाता है।
डॉ. संघई के मुताबिक पिंजड़े के भीतर एक उभारनुमा हिस्सा है, जिस पर पैर रखते ही एक सेकेंड के भीतर दरवाजा अपने आप बंद हो जाएगा। दरवाजा बंद होने की आवाज बहुत दूर तक जायेगी।
उन्होंने कहा कि उस उभारनुमा हिस्से तक पहुंचने के लिए बाघिन के शरीर का डेढ़ गुना हिस्सा केज के अंदर करना होता है। इससे उसके चुटहिल होने के चांस भी कम रह जाएंगे।