जसवंतनगर। दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग और फाटक संख्या 38सी, 40सी और 36सी के अंडरपास में कई फुट तक पानी भरे होने के कारण ग्रामीणों को प्रतिदिन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन अंडरपासों से सैकड़ों लोगों का आना-जाना रहता है, लेकिन जलभराव के कारण यह रास्ते पूरी तरह से बंद हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है, जिन्हें स्कूल पहुंचने के लिए मजबूरी में चार-चार रेलवे लाइन पार कर आना जाना पड़ रहा है। इससे बच्चों के जीवन पर बड़ा खतरा बना हुआ है।
दलबीर, राजवीर, शिवराज सिंह, बंटू ने बताया कि ट्रैक पार करते समय बच्चों के साथ हमेशा ही हादसे की आशंका बनी रहती है। ट्रैक पार करने के दौरान कई लोग काल के गाल में समा चुके हैं। बीते 17 अगस्त को भी गेट संख्या 40 सी पर नगला असरोही निवासी कृष्ण की ट्रेन की चपेट में आकर मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से लोग डरे हुए हैं। सबसे ज्यादा डर छोटे बच्चों का है जो अंडरपास में पानी भरा होने से ट्रैक पार कर ही स्कूल आते जाते हैं। शिक्षा जितनी जरूरी है, उतनी ही बच्चों की सुरक्षा भी जरूरी है। इस मार्ग से बाह तहसील के जैतपुर, जरार, नहटौली, पूठा, फतेहपुरा, फकीरे की मड़ैया, बाउथ, तिजोरा समेत 24 से अधिक गांवों के लोग राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे के लिए आते जाते हैं। ग्रामीण श्याम सुंदर, मनोज, अशोक कुमार, शिव प्रताप, संदीप, प्रवीण कुमार, विनोद कुमार और नीरज कुमार ने अंडरपास से पंप लगाकर पानी निकलवाए जाने की मांग की। नालियों की सफाई कराने और सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात करने की मांग की है। वहीं अंडरपास से पानी निकालने वाले ठेकेदार ने बताया कि ठेका अवधि समाप्त हो गई है, जिसके कारण वह कार्य करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रेलवे और प्रशासन ने समस्या पर तत्काल ध्यान नहीं दिया, तो वह प्रदर्शन करेंगे।