क्वारंटीन सेंटर पर दिव्यांग लेखपाल से मारपीट के मामले में शहर कोतवाल के तीन हमराह सिपाहियों को लाइन हाजिर करने और कोतवाल व अन्य स्टाफ की भूमिका की जांच सीओ अमृतपुर राजवीर सिंह करने के अधिकारियों के आश्वासन पर लेखपाल माने। इससे पूर्व जिलेभर के लेखपालों ने सदर तहसील में धरना देकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।
ठंडी सड़क स्थित नवभारत सभा भवन क्वारंटीन सेंटर पर तैनात दिव्यांग लेखपाल आशुतोष पांडेय ने रविवार की दोपहर कोतवाल और उनके साथियों पर मारपीट कर कार में डालकर ले जाने और कोतवाली में भी पीटने का आरोप लगाया था। लेखपाल काम बंद कर सात घंटे कोतवाली में डटे रहे थे। एडीएम, एएसपी, एसडीएम, सीओ की कई दौर की वार्ता भी विफल हो गई थी।
सोमवार को सुबह 10 बजे घोषणा के मुताबिक, जिले भर के लेखपाल तहसील सदर पहुंचे और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कहा कि वे बिना कार्रवाई के किसी भी कीमत पर काम पर नहीं लौटेंगेे। लेखपालों ने डीएम से मिलने की रणनीति बनाई।
डीएम ने प्रतिनिधि के रूप में एसडीएम सदर और एसपी ने सीओ अमृतपुर राजवीर सिंह को नामित कर दिया। दोपहर करीब 12 बजे दोनों अधिकारी तहसील सदर पहुंचे। उन्होंने लेखपालों से बात करने का प्रयास किया, पर लेखपाल नारेबाजी करने लगे। दोनों अधिकारी तहसीलदार के दफ्तर में बैठ गए।
वहीं लेखपालों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल उप्र लेखपाल संघ जिलाध्यक्ष सैदमीर खां, पीड़ित लेखपाल आशुतोष पांडेय, अजीत द्विवेदी, कायमगंज तहसील अध्यक्ष अजय कुमार, मीडिया प्रभारी रजत श्रीवास्तव वार्ता करने गए।
करीब डेढ़ घंटे चली वार्ता के बाद लेखपाल संतुष्ट हो गए। अफसरों ने कहा कि कोतवाल के तीन हमराह सिपाहियों को लाइन हाजिर कर कोतवाल समेत अन्य की भूमिका की जांच सीओ अमृतपुर राजवीर सिंह करेंगे। इस पर सहमति बन गई और सवा दो बजे धरना समाप्त कर दिया गया।
‘दिव्यांग लेेखपाल के साथ दुर्व्यवहार हुआ था, उनका संतुष्ट होना बेहद जरूरी था। पीड़ित आशुतोष पांडेय सहमत हो गए, लिहाजा धरना समाप्त कर दिया गया। हम सब सीओ के जांच अधिकारी बनने पर सहमत हैं।’ - सैदमीर खां, जिलाध्यक्ष, उप्र लेखपाल संघ
‘शुरुआती जांच में कोतवाल के तीन हमराह सिपाही दोषी पाए गए हैं, उन्हें लाइनहाजिर कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच लेखपाल जिस अधिकारी पर सहमत होंगे, वही करेगा, फिलहाल मेरे नाम पर सहमति जताई गई है।’ - राजवीर सिंह, सीओ अमृतपुर