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निलंबित अधीक्षक, जेलर से तीन घंटे तक पूछताछ

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निलंबित अधीक्षक, जेलर से तीन घंटे तक पूछताछ
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गैंगवार के दिन वारदात शुरू होने से लेकर खत्म होने तक मिनट टू मिनट जानकारी भी हासिल की---सब हेड
डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने कई जानकारियां भी जुटाईं
जेल अधीक्षक व जेलर को आमने-सामने बैठा की पूछताछ
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। ईद के दिन (14 मई) जिला जेल में तीन खूंखार अपराधियों के बीच हुए गैंगवार और तीनों की मौत के बाद मामले की जांच कर रहे डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने तीसरे दिन रविवार को जेल में पहुंचकर निलंबित जेल अधीक्षक श्रीप्रकाश त्रिपाठी और जेलर महेंद्र पाल को आमने-सामने बैठाकर करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। त्रिपाठी ने दोनों निलंबित अफसरों से गैंगवार के दिन दोनों का मिनट टू मिनट कार्यवाही को जानने का प्रयास किया। इस दौरान किसी को भी जेल परिसर में नहीं जाने दिया गया।
डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी मामले की विभागीय जांच कर रहे हैं। रविवार को निलंबित जेल अधीक्षक श्रीप्रकाश त्रिपाठी व जेलर महेंद्र पाल से पूछताछ के बाद डीआईजी जेल ने निलंबित वार्डन संजय खरे, हरीशंकर व पीएसी जवान अमित को भी बुलाया और इन तीनों से भी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, सभी का कहना था कि गैंगवार के दौरान जेल की बैरक या गेेट के पास मौजूद नहीं थे। सभी ने अपनी अलग-अलग स्थानों पर मौजूदगी की बात कही है। पूछताछ के दौरान सभी ने यह बात भी बताई कि गोलियों की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे, लेकिन वहां का नजारा देख डर गए फिर अफसरों को सूचना दी। डीआईजी जेल ने सभी की सुुबह सात बजे से लेकर सुबह दस बजे तक की मौजूदगी के स्थल, फिर वहां से घटनास्थल तक आने का समय और उनके द्वारा की गई कार्रवाई को दर्ज किया है। इस बाबत डीआईजी जेल ने कुछ भी बताने से इनकार किया और कहा कि अभी जांच जारी है। सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। जांच में पिस्टल व मैग्जीन कैसे और किसने पहुंचाई भी शामिल है।
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दोनों एफआईआर की जांच भी शुरू
जेल में गैंगवार व पुलिस मुठभेड़ मामले की जांच भी पुलिस अफसरों ने शुरू कर दी है। सीओ शीतला प्रसाद पांडेय के साथ रविवार को तीन जांच अधिकारी कोतवाल वीरेंद्र त्रिपाठी, इंस्पेक्टर रामाश्रय सिंह व एसएसआई सुशील चंद्र शर्मा जेल परिसर पहुंचे और कुछ बंदियों से बातचीत की। सीओ ने बताया कि कोतवाली में दर्ज मारे गए शार्प शूटर अंशू दीक्षित की दोनों रिपोर्ट की जांच शुरू की गई है। उन बंदियों से खासकर जिन्हें शार्प शूटर ने बंधक बनाकर वारदात को अंजाम दिया से पूछताछ की गई। इसके बाद जेल में घटना वाले दिन मौजूद पुलिसकर्मियों और जेल कर्मियों के भी बयान दर्ज किए गए।
ईद को मेराज ने दी थी पनीर-पूड़ी की दावत
14 मई को ही ईद थी और जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी के रिश्ते के भांजे मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अली ने 13 मई को ही सभी को ईद की पार्टी देने को कहा था। उसने घोषणा कर दी थी कि ईद की शाम को सभी बंदियों को पनीर व पूड़ी का इंतजाम उसके खर्च पर होगा। इसे लेकर सभी खुश भी थे। घटना के बाद 14 मई की ही रात को पोस्टमार्टम हाउस में मृतक मेराज के परिजनों ने भी बताया था कि एक दिन पूर्व बात हुई थी जिसमें ईद की अग्रिम बधाई दी थी और जेल परिसर में सभी बंदियों को पार्टी करने की बात कही थी। (संवाद)
ये था मामला
14 मई को जिला जेल रगौली में बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी के शार्प शूटर रहे अंशू दीक्षित ने माफिया मुख्तार के रिश्ते के भांजे कुख्यात अपराधी मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अली को गोलियों से उड़ा दिया था। इसके पूर्व उसने जेल में बंद पश्चिम उप्र के कुख्यात अपराधी मुकीम काला की भी गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। बाद में पहुंची जिला पुलिस ने अंशू को भी मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया था।
अभी तक न्यायिक जांच नहीं शुरू हो सकी
जिला जेल में दिनदहाड़े गैंगवार में गैंगस्टर अंशू दीक्षित द्वारा पिस्टल से दो कुख्यात अपराधियों मेराज अली व मुकीम काला की हत्या, फिर पुलिस मुठभेड़ में खुद के मारे जाने के तीन दिन बाद भी अभी तक न्यायिक जांच के आदेश जारी नहीं हुए हैं। जिले के जिस भी अधिकारी से पूछो तो वह कुछ भी बताने से इनकार कर बस यही कह रहा कि जांच चल रही है। मामले से जुड़ी जानकारियां मीडिया से छिपाने का प्रयास भी जेल प्रशासन व जांच अधिकारी कर रहे हैं। अधिकारी जांच के नाम पर बस बंद कमरे में बातचीत कर चार पहिया वाहनों से आ जा रहे हैं। कई जानकारों की मानें तो सब मामला प्रायोजित ही था, अब दोषी बनाए गए लोगों को बचाने की जुगत भी शुरू कर दी गई है।
जेल में पिस्टल और मैग्जीन कैसे पहुंची
जेल में कुख्यात अपराधी और पुलिस मुठभेड़ में ढेर अंशू दीक्षित के पास तक पिस्टल और मैग्जीन कैसे पहुंची और किसने पहुंचाई तीन दिन के बाद भी अभी तक कोई खुलासा नहीं हो सका है। अफसर जांच चल रही है कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। जांच के नाम पर जेल परिसर में अफसर पहुंचते तो हैं, लेकिन क्या हो रहा है, कोई कुछ बताने को तैयार नहीं हैं। उधर, पूरे मामले में अधिवक्ता रुद्र प्रसाद मिश्र का कहना है कि प्रशासन मुख्य आरोपियों को बचाना चाह रहा है। अभी तक सिर्फ जांच का बहाना कर अपना पक्ष मजबूत किया जा रहा है। ऐसे में तो लगता है कि निलंबित किए गए लोग ही मुख्य दोषी भी हैं।
पूरा मामला कारागार प्रशासन देख रहा है। जिला प्रशासन स्तर से जो कार्यवाही होनी थी वह सब कर दी गई है। आगे की कार्रवाई के लिए जेल प्रशासन की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। चित्रकूट जेल में चेकिंग के दौरान कई बार जेल अधीक्षक को बंदियों और बैरक की जांच पर विशेष जोर देने को कहा जाता था। इसके बावजूद इस तरह की घटना होने से सबक लेने की जरूरत है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
- शुभ्रांत कुमार शुक्ल, जिलाधिकारी, चित्रकूट
होमगार्ड लगा चुके शोषण का भी आरोप
जिला जेल रगौली में कैदियों व बंदियों की देखभाल व सुरक्षा के लिए होमगार्डों की ही ड्यूटी लगाई जाती रही है। ड्यूटी करने वाले होमगार्ड शोषण करने व मानदेय न देने को लेकर अफसरों को पत्र देकर आरोप भी लगा चुके हैं। जिला जेल में कई होमगार्डों की ड्यूटी लगी है जिसमें महिला होमगार्ड भी शामिल है। कुछ दिन पहले होमगार्डों ने कलक्ट्रेट परिसर में अफसरों को पत्र देकर आरोप लगाया था कि उनको मानदेय नहीं मिल रहा है। हालांकि, तीन बंदियों के मारे जाने की घटना के बाद से उन्होंने चुप्पी साध ली है।
इंसेट---
कर्मियों के क्रिया कलापों पर रखी जा रही नजर
जिला जेल में तैनात सुरक्षा कर्मियों सहित होमगार्डों के जेल के अंदर ड्यूटी के दौरान के क्रिया कलापों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पता लगाया जा रहा कि जेल के अंदर अंशू दीक्षित तक पिस्टल कैसे पहुंची। कहीं किसी पुलिस कर्मी ने तो नहीं अंशू तक पिस्टल पहुंचाई है। यह भी पता लगाया जा रहा कि ड्यूटी के दौरान कौन-कौन कर्मी अंशू दीक्षित से मिलता था। किस होमगार्ड ने कब-कब ड्यूटी की कि जानकारी ली जा रही है। हालांकि, अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
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15 हजार में कराई जाती थी वीडियो काल
गैंगवार से पहल रात में चेक किए गए थे सीसीटीवी कैमरे
रात में जेल अफसरों ने कुछ बंदियों की तलाशी भी ली थी
सुधीर अग्रवाल
चित्रकूट। जिला जेल में बाहरी जिले से आए बंदियों को 15 हजार रुपये महीना देने पर मोबाइल से वीडियो काल की भी सुविधा मुहैया कराई जाती थी। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखने के बावजूद अंदर काफी कुछ चलता रहता था। अफसरों के दौरे के दौरान सब कुछ सामान्य दिखाने की फटाफट तैयारी कर ली जाती थी और अफसरों के जाते ही फिर जेल में दबंग व माफिया बंदियों की तूती बोलने लगती थी।
जेल सूत्रों के अनुसार, शार्प शूटर अंशू दीक्षित ने सुल्तानपुर और रायबरेली की जेल में जो कुछ किया था, उसी तर्ज पर यहां भी पैठ बना ली थी। उसे फोन करने से कोई नहीं रोक सकता था। उधर, मेराज अली बेहद शांत रहता था, लेकिन उसका भी जेल में दबदबा था। शुक्रवार को घटना के पहले बृहस्पतिवार को जेल परिसर में देर शाम अंधेेरा होने के बाद जेल के अफसर बैरक की ओर आए और सभी सीसीटीवी कैमरे चेक कराया था। साथ ही कुछ बंदियों की तलाशी भी ली गई थी। इसे लेकर बंदियों ने शक जताया था कि आखिर रात को चेकिंग का क्या मतलब है, पहले तो ऐसा नहीं हुआ। अब ये सवाल उठ रहे हैं कि जब दो माह से कैमरे खराब थे और सबको पता भी था तो 13 मई की रात को जांच क्यों कराई गई।
बंदियों की रात में तलाशी लेने का भी मतलब समझ में नहीं आ रहा। आशंका जताई जा रही कि कहीं इसी बीच अंशू को पिस्टल तो नहीं पहुंचा दी गई। इसके दूसरे ही दिन सुबह गैंगवार में तीन खूंखार अपराधियों की मौत हो गई। वारदात के बाद जेल परिसर में कुछ बंदियों ने अफसरों को बताया था कि 15 हजार रुपये महीना देने पर वीडियो काल कराकर परिजनों व परिचितों से बातचीत कराई जाती है। पांच हजार रुपये महीना देने वालों को छोटे मोबाइल से सिर्फ बातचीत कराई जाती है। उधर, नए जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर ने कहा कि सब जांच का विषय है, अभी कुछ नहीं जा सकता। जांच रिपोर्ट के बाद ही सब सामने आएगा। कहा कि ऐसे तो कोई भी आरोप लगा सकता है।
अंशू का जेल में था काफी दबदबा
शार्प शूटर अंशू दीक्षित का जेल में काफी दबदबा था। कई बार उसकी जेल के कुछ अफसरों से तीखी नोकझोंक भी हुई। यहां तक कि मारपीट की नौबत भी आई थी। उसे फोन बेहद आसानी से उपलब्ध हो जाता था। ज्यादातर वह पीसीओ से ही फोन करता था। घटना के दिन भी वह पीसीओ की ओर फोन करने की बात कहकर जाते समय वहां न जाकर मुकीम काला के बैरक के पास पहुंचा और गोलियां चला दी। इसके बाद लौटकर अपने बैरक में मेराज को भी उड़ा दिया था।
जेल परिसर में आने जाने वालों से पूछताछ
जिला जेल रगौली में गैंगवार व मुठभेड़ में तीन अपराधियों के मारे जाने और जेल में पिस्टल आदि के पहुंचने की जांच के दौरान रविवार को कई अन्य लोगों से भी पूछताछ की गई है। जेल परिसर में दूध पहुंचाने वाले से पुलिसकर्मियों ने पूछताछ की।
अपराधी जेल में या छोड़ चुके प्रदेश
जिला जेल में शूटआउट मामले में प्रदेश के राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि मारे गए सभी अपराधी थे। जेल की सुरक्षा को लेकर सवाल पर कहा कि प्रदेश सरकार इसकी जांच करा रही है। रविवार को चित्रकूट स्थित अपने आवास में राज्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद अपराधी या तो जेल में हैं या फिर प्रदेश छोड़कर भाग रहे हैं। योगी सरकार से अपराधी कांप रहे हैं।
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चित्रकूट जेल में गैंगवार से मुख्तार की उड़ी नींद
बांदा। चित्रकूट जेल में हुए गैंगवार के बाद जेलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गैंगवार में मेराज अली और मुकीम काला की मौत के बाद 70 किलोमीटर दूर यहां जेल में बंद बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी भी सुरक्षा को लेकर बेचैन है। जेल सूत्रों के मुताबिक, बाहुबली रात को देर तक जागा और सुबह जल्दी उठ गया। ब्लड प्रेशर भी बढ़ा बताया गया। गैंगवार में मारे गए मेराज अली और मुकीम काला से मुख्तार अंसारी के संबंध जुड़ने से यहां जेल में भी हलचल बढ़ गई। मुख्तार की बैरक की सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई। सीसीटीवी कैमरों से बराबर उसकी बैरक पर जेल प्रशासन द्वारा निगाह रखी जा रही है, लेकिन हाई सिक्योरिटी जेल के अंदर गैंगवार की घटना ने बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की भी नींद उड़ा दी। सूत्रों के मुताबिक, शनिवार की रात मुख्तार देर तक नहीं सोया। अपनी बैरक में इधर-उधर टहलता रहा। आधी रात को नींद लगी और सुबह फिर जल्दी जाग गया। बताया गया कि नींद पूरी न होने पर मुख्तार का ब्लड प्रेशर बढ़ गया। उन्होंने दवा लेकर इसे काबू किया। हालांकि, जेल प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की। (संवाद)
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