शादी अनुदान के तीन आवेदन जांच में पूरी तरह से फर्जी पाए गए। जिन बेटियों के नाम से अनुदान के लिए समाज कल्याण विभाग में शादी के कार्ड लगाए गए थे, वास्तव में उनकी बेटियां ही नहीं थीं। दो आवेदन ऐसे हैं, जिसमें पति-पत्नी ने खुद को अलग दिखाकर आवेदन किए थे।
समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह ने तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। सीडीओ डॉ. महेंद्र कुमार ने फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 23 और आवेदनों की जांच करने के लिए छह सदस्यीय टीम गठित की है। टीम एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी।
समाज कल्याण विभाग में शादी अनुदान के लिए करीब 1200 लोगों ने आवेदन किया है। इसमें से 132 लोगों के हिसाब से बजट भी जारी हो चुका है। स्वीकृति के लिए फाइल सीडीओ के पास पहुंची तो उन्होंने तीन आवेदनों की रैंडम जांच डीडीओ जीपी गौतम से कराई।
जांच में पाया कि आवेदनकर्ता बर्रा-8 निवासी प्रदीप कुमार और रजनी शर्मा दोना पति-पत्नी हैं। दोनों ने अलग-अलग बेटी के नाम से आवेदन किया है। आवेदन में प्रदीप की बेटी उर्मिला और रजनी की बेटी प्रीती शर्मा है। वास्तव में इन दोनों की बेटियों के नाम अलग हैं।
दोनों दिल्ली में पढ़ाई कर रही हैं। तीसरा आवेदन श्याम नगर में रहने वाले ओम प्रकाश दीक्षित की बेटी सविता दीक्षित के नाम से था। इनकी भी वास्तविक बेटी का नाम कुछ और है। जांच टीम को बताया कि उन लोगों ने आवेदन ही नहीं किया।