कानपुर। कानपुर समेत प्रदेश के हजारों शिक्षामित्रों को नियमित पीएफ मिलने का रास्ता जल्द साफ हो सकता है। हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ ने सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक को सभी शिक्षामित्रों का डेटा एक महीने के भीतर पीएफ विभाग को देने के निर्देश दिए हैं। डेटा मिलने के बाद 8 सप्ताह में मामला निस्तारित करने को कहा है। इसके अलावा लखनऊ के पीएफ विभाग को पूरा मामला देखने के निर्देश दिए हैं। कानपुर नगर में तीन हजार से ज्यादा शिक्षामित्र हैं।
कुछ समय पहले कानपुर नगर, कानपुर देहात, ललितपुर, महोबा के बीएसए के खाते विभाग ने अटैच कर लिए थे। कानपुर नगर के 3300 शिक्षामित्रों की देनदारी 8 करोड़ 53 लाख, कानपुर देहात के 2650 शिक्षामित्राें की देनदारी 7 करोड़ 77 लाख, ललितपुर के 2300 शिक्षामित्रों की देनदारी 7 करोड़ 21 लाख और महोबा के 1600 शिक्षामित्रों की देनदारी 4 करोड़ 48 लाख रुपये निकली थी। इसके अलावा जिला लोक शिक्षा कल्याण समिति के 1150 प्रेरकों की 1 करोड़ 96 लाख की देनदारी निकाली गई थी।
सूत्रों ने बताया कि कानपुर नगर के बीएसए की ओर से एक याचिका हाईकोर्ट इलाहाबाद में दाखिल की गई थी। जिसमें कहा गया कि उनके खाते अटैच करना गलत है, और स्टे दे दिया गया था। एक अन्य मामले में लखनऊ खंडपीठ ने 17-25 नवंबर तक सुनवाई की। इसके बाद सर्व शिक्षा अभियान के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को निर्देश दिए कि कानपुर समेत सभी शिक्षामित्रों के डेटा एक महीने में पीएफ विभाग को उपलब्ध कराए जाएं। वहीं, कानपुर नगर के बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी का कहना है कि पीएफ विभाग ने खाते अटैच करने का नोटिस दिया था। बाद में नोटिस के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया था। उनका खाता अटैच नहीं है। वो इसका संचालन भी कर रहे हैं।