निजी महाविद्यालयों की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि प्रत्येक छात्र की उपाधि का 1000 शुल्क जमा कर सकें। इसी वजह से कॉलेज अभी तक परीक्षा शुल्क और उपाधि नहीं जमा कर पाए हैं। पहले करीब 50 हजार छात्रों नेफार्म नहीं भरा था तो एक दिन के लिए तिथि को विस्तारित कर 13 अप्रैल कर दिया था।
उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने कहा कि निजी महाविद्यालयों पर संकट अधिक है। शासन का आदेश गले की फांस बन गया है। अभी भी करीब 30 हजार छात्र ऐसे हैं जो परीक्षा फार्म का पैसा दे चुके, लेकिन उपाधि शुल्क नहीं दे सके हैं। उनका कहना है कि छात्रों को परीक्षा फार्म भरने की अनुमति मिले, वरना छात्रों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा।
वहीं, कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि शासन के आदेश का पालन हो रहा है। कुलाधिपति ने इस बार उपाधि शुल्क के साथ ही परीक्षा शुल्क लेने का आदेश दिया है। अब परीक्षा के बाद छात्रों की उपाधि सीधे घर पहुंचाई जाएगी। उनको विवि चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसलिए प्रक्रिया अपनाई जा रही है।