सरसौल का नंदेश्वर धाम सावन में आस्था का प्रमुख केंद्र रहता है। यहां दूर-दराज से श्रद्धालु पैदल, ट्रेन और निजी वाहनों से पहुंचते हैं। सावन के पहले सोमवार से ही मंदिर तक जाने वाले दोनों प्रमुख मार्गों की बदहाली सामने आ रही थी, लेकिन पूरा सावन बीतने के बाद भी सड़कों की स्थिति नहीं सुधरी।
मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़े कंकड़-पत्थर और कीचड़ भरा था। कई कांवड़िए इन्हीं उबड़-खाबड़ रास्तों पर नंगे पैर चलकर मंदिर पहुंचे। जर्जर मार्गों के कारण वाहनों की रफ्तार भी प्रभावित हुई और जगह-जगह जाम की स्थिति बनी रही।
दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। कई कांवड़िए कई किलोमीटर पैदल चलकर पसीने से तर हालत में मंदिर पहुंचे। इसके बावजूद भक्तों के उत्साह और हर-हर महादेव के जयकारों में कोई कमी नहीं आई।
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स्थानीय प्रशासन की ओर से मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए थे, लेकिन सड़कों की बदहाली के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। जाम और खराब रास्तों को लेकर श्रद्धालुओं में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी भी दिखाई दी।