लखनऊ-कानपुर हाईवे पर डिवाइडर तोड़कर बनाए गए कट से निकलते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
हाईवे का मूल उद्देश्य होता है कि आप अपनी मंजिल तक सुगमता से और सुरक्षित पहुंचे। लेकिन प्रदेश में एक हाईवे ऐसा भी है जहां किसी भी समय आप हादसे के शिकार बन सकते हैं।
जिसका मुख्य कारण है लापरवाही, लोगों का गैरजिम्मेदाराना रवैया। लोगों ने अपना मतलब सिद्ध करने के लिए हाईवे पर जगह-जगह कट मार दिए हैं जो कि आज मौत का शार्टकट बनते जा रहे हैं। इस हाईवे पर हादसे में हुई मौतों की संख्या जानने के बाद आप भी इसे मौत का हाईवे के नाम से ही पुकारेंगे।
लखनऊ-कानपुर हाईवे पर डिवाइडर तोड़कर बनाए गए कट से निकलते लोग।
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जिले में अधिकांश हादसे लखनऊ-कानपुर हाईवे और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर हो रहे है। लोगों द्वारा बनाए शार्टकट अधिकांश हादसों का कारण बन रहे है। साल 2017 में जिले में अबतक 567 सड़क हादसे में 216 की मौत हुई और 327 लोग घायल हुए है।
लखनऊ-कानपुर हाईवे पर कई जगह डिवाइडर तोड़कर बनाए गए शार्टकट हादसों कारण बने हैं। लखनऊ और कानपुर के बीच एनएचआई ने 61 अवैध कट चिहिंत किए हैं। इनमें से अधिकांश होटल-ढाबों, पेट्रोल पंपों और गांवों के सामने बनाए गए हैं।किसी ने ग्राहकों की सुविधा के लिए तो किसी ने अपने आवागमन को हाईवे का डिवाडर तोड़कर रास्ता बनाया है। शार्टकट के चक्कर में लोग निर्धारित रोड क्रास के बजाए मनमाने तरीके से दो पहिया-चार पहिया वाहन निकालते हैं और हाईवे पर तेज रफ्तार से गुजरते समय हादसे होते हैं।
लखनऊ-कानपुर हाईवे पर डिवाइडर तोड़कर बनाए गए कट से निकलते लोग।
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निर्माण एजेंसी पीएनसी के मैनेजर रनवीर सिंह ने बताया कि जहां डिवाइडर तोड़े गए हैं वह अधिकांश होटल, ढाबा और पेट्रोल पंप के सामने हैं। तोड़े गए डिवाइडरों की मरम्मत कराई जा रही है।
डिवाइडर तोड़ने वालों पर होगी एफआईआर
एनएचएआई के रीजनल मैनेजर क्षेत्रीय प्रबंधक पी शिवशंकर ने बताया शार्टकट के लिए तोड़ गए डिवाइडरों की मरम्मत होगी। मरम्मत के बाद दोबारा तोड़ने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।