एक बिल्डिंग में तीन कॉलेज संचालित किए जाने के तथ्य को छिपाने के लिए कानपुर के अभिनव इंस्टीट्यूट के प्रबंधन ने नया पैंतरा अपनाया है। प्रबंधन ने बिल्डिंग के बीच से दीवार खड़ी कर दी है। दोनों परिसर में प्रवेश के लिए दो अलग-अलग गेट भी लगा दिए हैं। अब प्रबंधन इसे दो अलग-अलग कॉलेज दिखाने में जुटा है। मामले में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी और डायट प्राचार्य ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। दोनों अधिकारियों ने इसी आधार पर कॉलेज की पूर्व प्राचार्या जिज्ञासा श्रीवास्तव के सभी आरोपों को खारिज करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
टिघरा गांव के चौबेपुर में स्थित अभिनव इंस्टीट्यूट की पूर्व प्राचार्या जिज्ञासा श्रीवास्तव ने अक्तूबर माह में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि उनके कॉलेज प्रबंधन ने गलत तरीके से एक ही बिल्डिंग दिखाकर तीन अलग-अलग कॉलेजों की मान्यता ले रखी है। इसमें अभिनव इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, आस्था इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल और अभिनव फार्मेसी कॉलेज संचालित होते दिखाया गया है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में कॉलेज के प्रबंधक एसएन श्रीवास्तव ने इन आरोपों को स्वीकार भी किया था। आरोपों को स्वीकारते हुए एसएन श्रीवास्तव ने अभिनव इंस्टीट्यूट को बंद करने के लिए सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी यूपी को पत्र भी लिखा था। लेकिन अब वह अपने कॉलेज को सही दिखाने में जुट गए हैं। जिज्ञासा श्रीवास्तव का आरोप है कि इसमें डायट प्राचार्य और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी भी उनकी मदद कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने मामले की नए सिरे से जांच के लिए फिर से मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।
तहसीलदार की रिपोर्ट से हुआ खुलासा
कॉलेज प्रबंधन ने भले ही बिल्डिंग के बीच से दीवार खड़ी कर दो कॉलेज दिखाने की कोशिश की है लेकिन तहसीलदार की रिपोर्ट ने इसे उजागर कर दिया। तहसीलदार की रिपोर्ट के मुताबिक खतौनी में अराजी संख्या 216,217 अभिनव इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्ट्डीज के नाम पर दर्ज ही नहीं है जबकि कॉलेज प्रबंधन ने इसी भूमि को इंस्टीट्यूट के नाम दिखाकर कॉलेज की मान्यता ले रखी है।
दोनों जांच अधिकारियों ने तहसीलदार से मांगी रिपोर्ट
मामले में पहले ही शासन को रिपोर्ट भेज चुके क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. अनिल मिश्रा और डायट प्राचार्य एके शुक्ला ने अभिनव इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, आस्था इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के गाटा अराजी संख्या के आधार पर रिपोर्ट मांगी है। दोनों अधिकारियों ने बताया कि रिपोर्ट मिलने के बाद फिर से शासन को दोबारा रिपोर्ट भेजी जाएगी।
एक जांच में इतना लंबा समय
शासन की ओर से डायट प्राचार्य और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को अक्तूबर में ही जांच के लिए आदेश दिया गया था। कॉलेज की पूर्व प्राचार्या जिज्ञासा श्रीवास्तव का आरोप है कि जानबूझकर दोनों अधिकारियों ने मामले को लटकाए रखा। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने कॉलेज प्रबंधन को बीच से दीवारें खड़ी करने का भरपूर मौका दिया हालांकि इसके बावजूद वह तहसील में दर्ज अभिलेखों को नहीं बदल पाए। जिज्ञासा ने मामले में इन दोनों अधिकारियों की जांच के लिए भी शिकायत की है।