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सुपाड़ी के अवैध कारोबार का गढ़ बना यूपी का ये शहर, जांच में हुआ बड़ा खुलासा

Thu, 24 Jan 2019 12:52 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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फर्जी फर्मों को माल की आपूर्ति कराने में कानपुर शहर के ट्रांसपोर्टरों की भूमिका सामने आने के बाद अब सुपाड़ी के अवैध कारोबार में कई नामचीन उद्योगपतियों व व्यापारियों की भी भूमिका सामने आ रही है।
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सेंट्रल और स्टेट जीएसटी मुख्यालय की शुरुआती जांच में इसका खुलासा हुआ है। माना तो ये जा रहा है कि फर्जी फर्म संचालकों, ट्रांसपोर्टरों और नामचीन उद्योगपतियों-व्यापारियों के गठजोड़ से शहर सुपाड़ी के अवैध कारोबार का गढ़ बन चुका है।

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एक माह पूर्व सेंट्रल जीएसटी की टीम ने देशभर में 35 ठिकानों पर छापा मारकर 200 करोड़ रुपये की सुपाड़ी का अवैध कारोबार पकड़ा था। पता चला था कि इतनी भारी-भरकम सुपाड़ी का परिवहन तो हुआ लेकिन माल किसके जरिये आया और कहां गया, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। इस कारोबार में दो दर्जन से अधिक फर्जी फर्मों की संलिप्तता भी सामने आई थी।

हत्थे चढ़े कुछ फर्जी फर्म संचालकों ने कानपुर के कुछ ट्रांसपोर्टरों के नाम बताए थे। सेंट्रल जीएसटी के इस खुलासे के बाद स्टेट जीएसटी ने संवेदनशील वस्तुओं की कर चोरी रोकने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है। इस टीम ने 20 दिन के भीतर शहर के चार ट्रांसपोर्टरों पर शिकंजा कसा। चारों ट्रांसपोर्टर फर्जीवाड़े में लिप्त मिले। एक के यहां तो 90 लाख की सुपाड़ी सीज भी की गई।
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तीन ट्रांसपोर्टरों के यहां व्यापारियों की बिल बुक बुकें मिलीं। अब ये टीम ट्रांसपोर्टरों के साथ शहर के व्यापारियों और उद्योगपतियों पर शिकंजा कस रही है। इन्हें बुलाकर पूछताछ की जा रही है। टैक्स चोरी की पुष्टि होने पर छापा मारा जा रहा है। सेंट्रल और स्टेट जीएसटी की नजरें अब शहर में सुपाड़ी के अवैध कारोबार पर टिकी हैं।

कानपुर के अफसरों का नेटवर्क ध्वस्त 
फर्जी फर्मों को माल की आपूर्ति करने का संगठित कारोबार शहर में फल-फूल रहा है लेकिन स्टेट जीएसटी के जोनल कार्यालय के अफसरों को इसकी भनक तक नहीं है। अब तक आधा दर्जन से अधिक बड़े खुलासे दूसरी टीमों ने किए। मुख्यालय के अफसर भी मानने लगे हैं कि जोनल कार्यालय में माहौल ठीक नहीं चल रहा है। इसी वजह से टैक्स चोरी रोकने में स्थानीय अफसर नाकाम हैं।  
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