तीन दिन में सिर्फ दो बार खाना खाया पर डिगने नहीं दिया हौसला
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लॉकडाउन के तीसरे दिन कानपुर में चार लोग राजस्थान से 600 किमी का सफर तय कर के पहुंचे। बताया बिहार जाने के लिए निकले हैं। कोई साधान नहीं मिला तो पैदल ही निकल लिए। अब कुछ भी हो घर तो जाना ही है, कैसे भी जाएं। राजस्थान से करीब 11 सौ किमी दूर बिहार जाने को पैदल निकले मजदूरों ने अपने अनुभव साझा किए तो एक पल के लिए आंखें नम हो गईं।
बाेले हम परिवार की परवरिश के लिए कमाई करने एक मार्च को राजस्थान के हवा महल बड़ी चौपड़ गए थे। दो चार दिनों में थोड़ा बहुत पैसा जोड़ पाए कि अचानक कोरोना वायरस के अटैक की वजह से शहर को लॉकडाउन कर दिया गया। एक सप्ताह में ही हमारे पास रही जमा पूंजी खत्म होने की कगार पर आ गई। ऐसे में हम सभी ने थोड़ा थोड़ा पैसा बचने के बाद बुधवार को अपने घर गया, बिहार लौटने का फैसला लिया।
लॉकडाउन के कारण घर जाने का कोई साधन नहीं मिला तो हौसला डिगने नहीं दिया और 1100 किमी की दूरी को तय करने के लिए पैदल ही निकल पड़े। घर पहुंचने की भूख के आगे हमारे शरीर की भूख, प्यास भी बुझ सी गई है। हमने तीन दिनों में सिर्फ दो बार ही खाना खाया है। यह अनुभव शुक्रवार को राजस्थान से कानपुर पहुंचे मजदूरों ने अमर उजाला से साझा किए।
बिहार, गया के बाराचट्टी थाना क्षेत्र में रहने वाले महेश यादव, धिरगू मंडल, मिंटू यादव, संजय कुमार यादव, कैलाश यादव रास्थान में रिक्शा चला कर कमाई करने के लिए गए थे। इस बीच कोरोना वायरस ने सभी व्यापार, धंधों को चौपट कर दिया। जल्द ही उन्हें एहसास हो गया कि कोरोना वायरस और शहर के लॉकडाउन के खत्म होने का इंतजार करने से अच्छा है कि वो राजस्थान से अपने घर के लिए पैदल ही निकल जाएं।
बुधवार की रात करीब आठ बजे खाना खाने के बाद सभी करीब 25 किमी की दूरी तय करके हाईवे पर पहुंचे। यहां कुछ पुलिसकर्मियों ने उनकी मदद की हाइवे पर एक ट्रक को रुकवा कर करीब दो किमी की दूरी वाहन से तय करवा दी। मजदूरों ने बताया कि वह लगातार पैदल चलते रहे, कई जगहों पर कुछ पुलिस कर्मियों ने ट्रक पर बैठा कर उनकी साहयता। इस तरह से उन्होंने शुक्रवार तक राजस्थान, वाया आगरा से कानपुर तक कुल 513 किमी का सफर तय कर लिया है।
मजदूरों के अनुसार कानपुर में पनकी पड़ाव के पास एक दुकानदार ने उनसे जारी जानकारी ली और इंसानियत के नाते उन्हें खाना बनाने के लिए अपने बर्तन और चूल्हा दे दिया। इस पर सभी पैसे मिलाकर खाने पीने का कुछ सामान खरीदने के बाद खाना बनाया और मददगार का शुक्रिया अदा कर फिर से अपने गंतव्य को निकल पड़े।
करीब आठ किमी की दूरी तय कर बर्रा बाईपास से होते हुए वाया इलाहाबाद से बिहार गया करीब 574 किमी दूरी तय करने के लिए पैदल ही रवाना हो गए। मजदूरों के चेहरों पर इस बात को लेकर मायूसी देखने को मिली कि वे अपने परिवार की परवरिश के लिए गए थे, लेकिन उनकी मंशा पूरी नहीं हो सकी। चलते-चलते मजदूरों ने कहा कि देखा जाएगा जिंदगी रही और कोरोना खत्म हुआ तो एक बार फिर से किस्मत आजमाने के लिए राजस्थान जरूर जाएंगे।