कानपुर। फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह ने जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए एक नया तरीका अपनाया। गिरोह से जुड़े शातिर कैशांबी और छोटे जिलों के ऐसे कॉलेजों के नाम पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट तथा अन्य प्रमाणपत्र तैयार कर रहे थे जो वर्षों पहले बंद हो चुके हैं या जिनकी गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं। इनका चयन इसलिए किया जाता था ताकि प्रमाणपत्रों की सत्यता की तत्काल जांच न हो सके।
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य विभिन्न जिलों के बंद या निष्क्रिय शिक्षण संस्थानों का डाटा जुटाकर उनके नाम, कोड और प्रारूप का इस्तेमाल करते थे। इसके आधार पर हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के माध्यमिक शिक्षा परिषद के मार्कशीट और प्रमाणपत्र तैयार कर जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध कराते थे। इसके बदले मोटी रकम लेते थे। छापे के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई जिलों के इंटर कॉलेजों के नाम पर बने प्रमाणपत्र, मार्कशीटें और संबंधित दस्तावेज बरामद किए हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि गिरोह लंबे समय से यह धंधा कर रहा था और फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल नौकरी, प्रवेश और अन्य सरकारी-गैर सरकारी कार्यों में किया जा रहा था। पुलिस अब बरामद दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगा रही है कि किन-किन जिलों के कॉलेजों के नाम का इस्तेमाल किया गया और अब तक कितने लोगों को फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और लाभार्थियों की भी तलाश की जा रही है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि बोर्ड की जो मार्कशीट मिली हैंं, वह कौशांबी जैसे छोटे जिलों से संबंधित कॉलेजों की थी। पूरे प्रकरण की जांचकर इससे जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।