कानपुर। बर्रा आठ निवासी कंटेनर मालिक रघुनंदन सिंह के भाई बृजेंद्र सिंह ने पुलिस को बताया कि 22 अक्तूबर की रात कंटेनर चालक ने उन्हें फोन किया। कहा, रघुनंदन सिंह की हालत बहुत खराब है। इस पर उन्होंने कर्नाटक जाने के लिए नौ हजार रुपये का प्लेन का टिकट बुक कराया। वह तैयारी कर ही रहे थे कि देर रात 11 बजे कॉल कर चालक ने उनकी मौत की खबर सुना दी। फिर परिवार वालों को वहां आने से भी रोक दिया। अस्पताल और कानपुर तक एंबुलेंस का खर्चा बताकर कुल सवा दो लाख रुपयों की मांग की।
भाई बृजेंद्र ने देर रात इतनी बड़ी रकम दे पाने में असमर्थता जताते हुए शहर आने पर रुपये देने का आश्वासन दिया। इस पर चालक शव को बाकायदा कफन में लपेटकर निकला। 23 अक्तूबर की देर रात सचेंडी स्थित पैतृक गांव रायपुर शव लेकर पहुंचा। भाई के अनुसार इस बीच चालक ने उन्हें रुपयों की व्यवस्था कर लेने के लिए रास्ते से कई बार कॉल भी की। गांव पहुंचने पर चालक ने उन्हें शव की दशा बेहद खराब होने की बात कहकर डराया।
चीखपुकार के बीच उन लोगों को कतई संदेह नहीं हुआ। उन्होंने चालक को चारपाई पर आराम कर अंतिम संस्कार से लौटकर आने के बाद रुपये देने की बात कही। 24 अक्तूबर को वह लोग जब शव का ड्योढी घाट पर अंतिम संस्कार कराने पहुचे तो चोटों के निशान देखकर हत्या का शक हुआ। इस पर उन लोगों ने तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम पर सूचना दी। आरोप है कि पुलिस मौके पर आई और घटना बंगलूरू की बताकर वहीं पोस्टमार्टम कराने की सलाह देकर चली गई। वह लोग शव लेकर गांव पहुंचे तब तक आरोपी चालक भाग निकला। हंगामे के बाद सक्रिय हुई गुजैनी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
कुछ परिजन पहले महाराजपुर और फिर गुजैनी थाने गए। पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस ने घटना स्थल बंगलूरू का बताकर परिजनों की मदद करने से इन्कार कर दिया। बकौल भाई बृजेंद्र के अनुसार इस पर उन्होंने कई लोगों से सिफारिश लगाई। इसके बाद गुजैनी पुलिस पोस्टमाॅर्टम कराने को राजी हुई। इसके चलते शनिवार दोपहर के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। फिर अधिकारियों से आदेश मिलने के बाद देर शाम शव का पोस्टमॉर्टम हो सका।