दीपावली के त्योहार पर आतिशबाजी चलाने में बरती गई लापरवाही खुशियों को फीका कर सकती है। त्योहार पर आतिशबाजी चलाने में सतर्कता बरतें। तेज आवाज और गाढ़ा सफेद धुआं छोड़ने वाली आतिशबाजी से परहेज करें। आतिशबाजी चलाने से निकलने वाली कार्बन मोनोआक्साइड व सल्फर डाई आक्साइड गैसें सेहत के लिए हानिकारक हैं। यह सांस रोगी बना सकती हैं। सिर दर्द, चक्कर, घबराहट व उल्टी आने की भी समस्या हो सकती है।
यह बरतें सावधानी
- आतिशबाजी खुले स्थान पर चलाएं
- अधजले पटाखे को दोबारा आग न लगाएं, उस पर पानी डाल देें
- बच्चों के आतिशबाजी छुड़ाते समय बड़े साथ में रहें
- धातु या शीशे की वस्तु में रखकर पटाखा न चलाएं
- आतिशबाजी चलाते समय पानी की बाल्टी पास में रखें
- आतिशबाजी चलाते समय देख लें कि आस-पास ज्वलनशील सामग्री तो नहीं है
- अस्पताल के पास आतिशबाजी न चलाएं
डॉक्टर की सलाह
- जलने पर तुरंत उस जगह ठंडा पानी डालें
- जली हुई चीज पर मक्खन, पाउडर आदि न डालें, इससे संक्रमण का खतरा रहता है
- जलने वाली जगह का आकार बड़ा हो तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं
- तेज रोशनी वाली आतिशबाजी चलाने पर चश्मा पहन सकते हैं।
दमा रोगी विशेष ध्यान रखें
आतिशबाजी चलाने के दौरान दमा रोगी विशेष ध्यान रखें। दीपावली के एक दो दिन तक हवा में आतिशबाजी से निकली गैसें रहती हैं। यह नुकसानदायक हैं। ऐसे में अपने साथ इन्हेलर रखें। दमा नियंत्रण के लिए डॉक्टर का परामर्श ले लें।