हादसे के बाद मलवे काे हटाने में लग गए दाे दिन
कानपुर के जाजमऊ में सपा नेता महताब आलम की अवैध इमारत ढहने के बाद से कई लोग अभी भी गायब हैं। तीसरे दिन अपनों की तलाश में कई लोग फोटो लिए यहां-वहां भटकते दिखाई दिए। उनके परिवार के लोग अपनों का फोटो लेकर जाजमऊ से पोस्टमार्टम तक चक्कर लगा रहे हैं। शुक्रवार दोपहर एक शख्स अपने भाई और दूसरा साले का फोटो लेकर एनडीआरएफ अफसरों के पास पहुंचा, बोले, साहब सुशीला की तरह इन्हें भी ढूंढ दो, यहीं मलबे में तो नहीं दबे हैं। अफसरों ने मदद का भरोसा देकर दोनों को वहां से हटा दिया।
हादसे में मां की मौत
अपने रिश्तेदारों को तलाशने आये लोग
चकेरी के श्याम नगर निवासी भूपेंद्र सिंह ने बताया सपा नेता की निर्माणाधीन इमारत में वह, मां निर्मला (हादसे में मृत) और भाई मुकेश व कृष्णा के साथ मजदूरी करता था। घटना के दिन वह छुट्टी पर था। मां, मुकेश और कृष्णा काम पर थे। हादसे में मां की मौत हो गई। मुकेश अस्पताल मेंर्ती है। कृष्णा (22) का लापता है। मां का अंतिम संस्कार करने के बाद घाट से घटनास्थल पर पहुंचे भूपेंद्र ने सीएनडीआरएफ कमांडर आलोक सिंह को भाई को फोटो दिखाया और कहा कि साहब यह मेरा भाई है, जो हादसे के बाद से गुम है। इसे ढूंढ दो साहब, यहीं मलबे में दबा होगा। थोड़ी देर बाद श्याम नगर निवासी मंगला प्रसाद साले सियाराम का फोटो लेकर वहां पहुंचे और कमांडर और बचाव कार्य में लगे अफसरों से कहा कि घर में कोहराम मच गया। साला गुम है, ढूंढ दो साहब। हो सकता है मलबे में दबा हो। इस तरह कई लोग अपनों की तलाश में घटनास्थल के आसपास भटकते रहे। कुछ ने तो पुलिस पर शव गायब करने का आरोप भी लगा गुस्से का इजहार किया।
महताब को नहीं पकड़ सकी पुलिस
महताब आलम
कानपुर जाजमऊ में अवैध इमारत गिरने के मामले में आरोपी सपा नेता महताब आलम को पुलिस शुक्रवार को भी नहीं पकड़ सकी। अफसरों का दावा है कि महताब और इमारत बना रहे ठेकेदार की तलाश में उनके घर और संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई, लेकिन कोई नहीं मिला। मोबाइल और मुखबिरों के जरिए दोनों की लोकेशन पता लगाई जा रही है। बता दें कि केडीए के विशेष कार्याधिकारी डीडी वर्मा की तहरीर पर चकेरी पुलिस ने महताब आलम और ठेकेदार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत कई संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस का कहना है कि घटना के बाद महताब शहर छोड़कर चला गया है। वहीं महताब के करीबियों से पता चला है कि उसने सत्ताधारी दल के नेताओं के यहां शरण ले रखी है।
एनडीआरएफ और सेना अफसरों में फिर तनातनी
बचाव कार्य में जुटी सेना
जाजमऊ में बृहस्पतिवार बिल्डिंग के मलबे में दबे लोगों को सकुशल निकालने को लेकर सेना और एनडीआरएफ के अफसरों में शुक्रवार को फिर तनातनी हो गई। एनडीआरएफ टीम मलबे में दबे लोगों को आधुनिक तकनीक से सकुशल निकालना चाह रही थी जबकि फौजी जेसीबी से स्लैब तोड़कर मलबे में फंसे लोगों को निकालना चाहते थे। इसके लिए एनडीआरएफ टीम राजी नहीं थी। अफसरों केबीच नोंकझोक देख वहां मौजूद प्रशासनिक अफसरों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। इसके बाद फौजी व्यवस्था संभालने और एनडीआरएफ टीम राहत और बचाव कार्य में जुट गई।
एनडीआरएफ अफसरों ने बताया कि पेन केक की तरह निर्माणाधीन सात मंजिला इमारत गिरी है, ऐसे हालात में मौजूद उपकरणों में चिपिंग ड्रिल और हैमर मशीन का इस्तेमाल कर मलबे में फंसे लोगों को जिंदा बचाया जा सकता है। ज्यादा उपकरणों के प्रयोग से अगल-बगल स्थित जर्जर इमारतें भी गिर सकती हैं। इसलिए अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
भारत माता जयघोष के साथ लौटे फौजी
बचाव कार्य में जुटी सेना
जाजमऊ के गज्जूपुरवा में निर्माणाधीन इमारत ढहने के बाद सेना की टीम मौके पर पहुंच गई थी। फौजी भीड़ के साथ ही राहत और बचाव कार्य में भी पुलिस व प्रशासन की मदद में जुट गए थे। फौजी एनडीआरएफ के साथ भी राहत और बचाव कार्य में सहयोग कर रहे थे। शुक्रवार दोपहर तक सेना केअफसर टीम के साथ मौजूद रहे। इसके बाद फौजियों ने एकजुट होकर भारत माता की जय के नारे लगाए और फिर अपनी गाड़ियों पर बैठकर सेना के स्टेशन लौट गए।
तीसरे दिन नहीं मिला कोई शव या घायल
एनडीआरएफ की टीम
जाजमऊ में सपा नेता महताब आलम की अवैध इमारत ढहने के तीसरे दिन शुक्रवार को राहत कार्य अंतिम दौर में पहुंच गया है। शुक्रवार देर शाम सेना ने साइट को क्लियर (इमारत में किसी के दबे न होना) बताया है। हालांकि नेशनल डिजास्टर रेस्क्यू फोर्स (एनडीआरएफ) का अभियान जारी है। इस हादसे में अब तक 10 मजदूरों की मौत हो चुकी है। 21 से अधिक मजदूर घायल हैं। शुक्रवार देर शाम तक मृतक और घायलों की संख्या न बढ़ने से पुलिस-प्रशासन और बचाव कार्य में लगी टीमों ने राहत की सांस ली है। एनडीआरएफ के कमाडेंट आलोक कुमार सिंह ने बताया कि पूर्व में चलाए गए बचाव अभियान में तीन से चार दिनों तक लोग जीवित मिले थे। इस लिए पूरी तरह से साइट क्लियर होने तक टीम राहत और बचाव कार्य जारी रखेगी।
सेना ने ली डॉग स्वायड की मदद
सेना
राहत और बचाव में जुटी सेना ने ढही इमारत के भीतर अपने प्रशिक्षित डॉग मनन और मंशन को भेजा। दोनों ने करीब आधे घंटे की सर्च के बाद मलबे में किसी व्यक्ति के दबे न होने के संकेत दिए। कर्नल दुष्यंत सिंह ने बताया कि लैब्रा प्रजाति के यह डॉग सेना के महत्वपूर्ण अंग हैं। यह गंध के जरिए किसी घायल या शव होने की जानकारी दे देते हैं। दोनों ने इमारत के अंदर किसी की मौजूदगी के संकेत नहीं दिए हैं। दूसरी ओर, एनडीआरएफ के कैमरों से भी किसी के अंदर दबे होने की जानकारी नहीं मिली। एनडीआरएफ ने इमारत का करीब 40 फीसदी हिस्सा साफ कर दिया। इमारत केबीचोंबीच का हिस्सा हटा दिया गया। अब साथ बने मकान की ओर इमारत का हिस्सा हटाया जाना है। इसमें क्षतिग्रस्त हुए मकान की ऊपरी मंजिल गिरने की आशंका में एनडीआरएफ फूंक-फूंककर कदम रख रही है।
लापता श्रमिकों के परिजनों ने किया हंगामा
लोगों को शांत कराती पुलिस
जाजमऊ हादसे में लापता श्रमिक के परिजनों ने शुक्रवार को घटनास्थल पर पहुंचकर हंगामा किया। हादसे की जगह पर सुबह से ही लापता श्रमिकों की भीड़ जमा थी। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं थीं। इनमें से करीब चार से छह महिलाओं ने अपने परिजनों का पता नहीं चलने की बात कही। महिलाएं रो-रोकर गुम परिजनों का जानकारी अफसरों से मांगती रहीं। काफी देर के बाद भी जब कोई सही जवाब नहीं मिला तो उनके सब्र का बांध टूट गया। तीन दिनों से भाई, पति, बेटे से मिलने या उनका पता लगने का इंतजार कर रहीं महिलाएं और उनके परिजन हाथों में गुम्मे-पत्थर लेकर हाईवे की ओर बढ़े। चकेरी थाने की पुलिस ने उन्हें हाईवे की सर्विस रोड पर ही रोक लिया। काफी देर चले हंगामे और मान-मनौव्वल के बाद पुलिस महिलाओं को समझा सकी। सभी को एक बस में बिठाकर हैलट अस्पताल भिजवाया गया।