कानपुर आये रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल ने बताया कि पहले एक पटरी 13 मीटर की होती थी, जिसे फिश प्लेटों से जोड़ा जाता था, लेकिन वर्तमान समय में तीन से आठ किमी का वेल्डिंग ट्रैक हो गया है। ट्रैक लंबा होने से कर्मचारी पैदल पूरे ट्रैक पर नजर नहीं रख पाते हैं। कहीं न कहीं चूक हो जाती है। इसी चूक को रोकने के लिए जल्द ही अल्ट्रासोनिक वैन से निगरानी की योजना है। एक माह के भीतर यह वैन मुहैया हो जाएगी। इस दौरान रेलवे के सिगनल एंड टेली कम्यूनिकेशन के डीजी अखिल अग्रवाल, मेंबर इंजीनियरिंग आदित्य मित्तल, मेंबर रोलिंग स्टाफ रवींद्र गुप्ता, उत्तर-मध्य रेलवे के जीएम अरुण सक्सेना, मंडल रेल प्रबंधक संजय कुमार पंकज, मुख्य वाणिज्य प्रबंधक डीके त्रिपाठी और सीपीआरओ विजय कुमार मौजूद रहे।
तड़के अफसर भी करेंगे ट्रैक की पेट्रोलिंग
चेयरमैन ने बताया कि हादसों के मद्देनजर 5 जनवरी से 5 फरवरी तक सेफ्टी माह चलाया जा रहा है। इस दौरान अफसर पैदल रेलवे ट्रैक का निरीक्षण करेंगे। खामी पाए जाने पर उसे दुरुस्त कराएंगे। अधिकतर हादसे भोर में 3-5 बजे के बीच हुए हैं। इसलिए इसी समय में अफसरों को ट्रैक की निगरानी का निर्देश दिया गया है। साथ ही चालकों को भी कहा गया है कि अगर ट्रैक पर उन्हें कहीं भी झटका सा महसूस हो तो तत्काल अगले स्टेशन पर इसकी सूचना दर्ज कराएं, ताकि हादसों को रोका जा सके।
रेल संरक्षा के लिए 20 हजार करोड़ का प्रस्ताव
चेयरमैन ने कहा कि रेल संरक्षा के लिए सलाना 20 हजार करोड़ का बजट दिए जाने का प्रस्ताव है। इसे आगामी बजट में रखा जाएगा। इसके लिए वित्त मंत्रालय और रेल के आउटसोर्सिंग के जरिए धन जुटाया जाएगा। पांच साल में इसके लिए एक लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है।
रेलवे एक नजर
देशभर में एक लाख दो किमी का रेलवे ट्रैक है
20 हजार ट्रेनें, जिनमें 12 हजार पैसेंजर और 8 हजार मालगाड़ी हैं
ढाई करोड़ यात्री रोजाना करते हैं यात्रा
रेलवे के 13 डिवीजनों की निगरानी में होता है ट्रेनों का संचालन